मेरठ: गांव में नहीं श्मशान, अंतिम संस्कार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर परिजन
कोरोना वैक्सीनेशन के दौरान जिले में पहले पायदान पर रहा था गांव बंशीपुरा
दौराला विकास खंड के सरसवा गांव के माजरा बंशीपुरा में लगभग दो सौ परिवार रहते है। यहां, की आबादी लगभग 600 से अधिक है।
मेरठ, अमृत विचार। यूपी के मेरठ जिले का एक ऐसा गांव, जहां अपनों की मौत के बाद परिजनों को दाह संस्कार की चिंता सताने लगती है। दरअसल, सरसवा गांव के माजरा बंशीपुरा गांव में आज तक श्मशान नहीं है। अपनों की मौत के बाद ग्रामीणों को साढ़े तीन किमी दूर या काली नदी किनारे व अपने खेत खलियान में अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। लगातार अधिकारियों से श्मशान बनाने की मांग की जा रही है। परंतु, श्मशान नहीं बन सका।
200 परिवारों को झेलनी पड़ रही परेशानी
गांव निवासी कैप्टन आदेश गुर्जर, अजब सिंह, राजबीर सिंह, भीष्म, सतीश, अभय सिंह आदि ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि बंशीपुरा गांव पुराना गांव है। बंशीपुरा व सरसवा की दूरी लगभग साढ़े तीन किमी है। दोनों गांव का प्रधान भी एक ही है।
बताया कि गांव में आज तक श्मशान का निर्माण नहीं हो सका। जन प्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों से श्मशान का निर्माण कराए जाने को लेकर गुहार लगाई जा चुकी है। परंतु, गांव में श्मशान का निर्माण नहीं हो सका। गांव में किसी की मौत हो जाने पर परिजनों पर दुखों का पहाड़ तो टूटता ही, परंतु उससे ज्यादा चिंता दाह संस्कार को लेकर होती हैं। ग्रामीणों को साढ़े तीन किलोमीटर दूर सरसवा गांव, नदी किनारे या अपने खेत खलियान में अंतिम संस्कार करने जाना पड़ता है।
सबसे अधिक समस्या बरसात के समय आती है। उस दौरान सरसवा गांव तक ग्रामीण नहीं पहुंच पाते और गांव में ही अपने खेत या नदी किनारे टैंट लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। गांव में राजस्व की भूमि भी है। लेकिन, इसके बाद भी श्मशान का निर्माण नहीं हो सका।
वैक्सीनेशन में पहले पायदान पर रहा था बंशीपुरा
बंशीपुरा गांव में कोरोना काल में वैक्सीनेशन के मामले में जिले के अंदर पहले पायदान रहा था। ग्रामीणों की जागरुकता के चलते इस गांव के सभी ग्रामीणों ने पहली डोज में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। जिस पर जिलाधिकारी ने इस गांव की प्रधान, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी व सीएचसी प्रभारी को सम्मानित भी किया था। परंतु, श्मशान ना होने के कारण यहां के ग्रामीणों को समस्या से जूझना पड़ रहा है।
अख्तियारपुर गांव में भी नहीं था श्मशान
दौराला। अख्तियारपुर गांव में पिछले वर्ष दिसंबर माह में श्मशान न होने के कारण ग्रामीणों को नदी किनारे टैंट लगाकर एक महिला का अंतिम संस्कार करना पड़ा था। जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना दर्द बयां करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद जन प्रतिनिधियों ने गांव में पहुंचकर श्मशान बनवाने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों ने स्वयं चंदा इकट्ठा कर गांव में श्मशान बनाया।
क्या कहते हैं ग्राम प्रधान?
सेबी रिजवी (ग्राम प्रधान, सरसवा) ने बताया कि बंशीपुरा में श्मशान का निर्माण कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है। यहां, खत्तों की जमीन पड़ी है। शासन यदि खत्तों की भूमि पर श्मशान बनानेे की अनुमति दे देगा तो जल्द निर्माण करा दिया जायेगा।
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