रुद्रपुर: न्यायिक कार्यों के विकेंद्रीकरण के खिलाफ अधिवक्ताओं का धरना जारी
रुद्रपुर, अमृत विचार। जिला न्यायालय के न्यायिक कार्यों के विकेंद्रीकरण को लेकर जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने जजी गेट के बाहर पर धरना-प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि जिस प्रकार न्यायिक कार्यों का विकेंद्रीकरण हो रहा है। उससे वादकारियों और अधिवक्ताओं को कार्यों में दिक्कतें आएंगी। उन्होंने आगाह किया कि जब तक विकेंद्रीकरण का आदेश रद्द नहीं होगा। तब तक प्रत्येक कार्य दिवस पर एक घंटे का धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
मंगलवार को कार्यक्रम संयोजक एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आरपी सिंह सहित तमाम अधिवक्ताओं न्यायालय परिसर के मुख्य गेट के बाहर इकट्ठा हुए और दोपहर एक बजे से दो बजे तक धरना दिया। अधिक्ताओं का आरोप था कि जिला न्यायालयों का विकेंद्रीकरण कर तहसील स्तर पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय स्थापित करने का आदेश पारित हुआ है,जबकि जिला मुख्यालय से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर तहसील किच्छा व गदरपुर में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय स्थापित किए गए है। दोनों ही स्थानों पर पीठासीन अधिकारियों एवं कार्मिकों के बैठने व न्यायिक कार्यो को संपादित करने की कोई उचित व्यवस्था भी नहीं है।
कहना था कि यदि जिला न्यायालयों के न्यायिक कार्यों को विकेंद्रीकरण होता है, तो वादकारियों एवं अधिवक्ताओं दोनों को ही परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि एक स्थान पर वादी को याचिका एवं प्रशासनिक कार्रवाई करने का मौका मिलता है।
उन्होंने आगाह किया कि यदि जल्द ही आदेश को रद्द नहीं किया, तो जिला बार एसोसिएशनों के साथ ही उच्च न्यायालय को ज्ञापन देकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। इस मौके पर महेश बब्बर, शुभम गगनेजा, इंद्रपाल धारीवाल, अजय यादव, गौरव बिष्ट, राहुल प्रजापति, सागर अरोरा, प्रियंका शर्मा, सूर्याश त्रिपाठी, राजीव सिंह, सुधाशु जोशी, केडी मिश्रा, प्रेमलता सिंह, सुखेंद्र सरकार, संजीव फोगाट, सुबेग सिंह, सरिता सक्सेना आदि मौजूद रहे।
