रामपुर : हुसैनी सराय ध्वस्तीकरण मामले में छह साल बाद दर्ज होगा आजम खां और वसीम रिजवी पर मुकदमा

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 नवाब रजा अली खां ने रेलवे स्टेशन के निकट होने के कारण सराय बनाने को वक्फ करा दी थी जमीन, आजम ने सत्ता के बल पर बुलडोजर से ढहाया था निर्माण

छह साल पहले आजम खां द्वारा ध्वस्त कराई गई हुसैनी सराय पर चलती जेसीबी (फाइल फोटो)

रामपुर,अमृत विचार। हुसैनी सराय ध्वस्तीकरण का जिन्न छह साल बाद फिर बाहर आने वाला है। इस मामले में आजम खां और शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी (स्वामी जितेंद्र नारायण त्यागी) और पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आरपी सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है। मुंबई से पहुंचे सेंट्रल वक्फ काउंसिल के पूर्व सदस्य और अधिवक्ता एजाज नकवी ने मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट की और जल्द रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। 

बता दें कि अंतिम नवाब रजा अली खां ने रेलवे स्टेशन के पास होने की वजह से विकास भवन के पास की जमीन पर सराय बनाने के लिए वक्फ कर दिया था। वजह यह थी कि बाहर से आने वाले व्यापारी या अन्य किसी को रुकने के लिए कोई स्थान नहीं था। सराय बनने से पहले ही रियासत का विलय हो गया था। बाद में शिया वक्फ बोर्ड ने हुसैनी सराय बनाने का निर्णय लिया था। वक्फ के मुतवल्ली पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हुसैनी सराय बनाने से पहले नीचे मार्केट का निर्माण इसलिए कराया ताकि वक्फ संपत्ति को आय भी होती रहे। ऊपर ठहरन के लिए सराय बनाई जा रही थी।

अधिवक्ता एजाज नकवी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी आरपी सिंह और सीओ आलेहसन ने निजी जेसीबी मशीन से हुसैनी सराय को ध्वस्त करा दिया था। पूर्व मंत्री आजम खां ने शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहे वसीम रिजवी के साथ ऐसा कराया। 2016 में तोड़ी गई हुसैनी सराय मामले में उल्टे मुतवल्ली नवेद मियां के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया था। इस मामले में तब से अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस मामले में तहरीर भी दी गई थी।

अल्लामा जमीर नकवी ने भी इस सिलसिले में कई बार पत्र लिखा था। इस मामले में शनिवार को अधिवक्ता एजाज नकवी मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह और डीआईजी शलभ माथुर से मिले। उन्होंने हुसैनी सराय ध्वस्तीकरण के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा छह साल बाद भी दर्ज नहीं होने पर आपत्ति जताई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि उपचुनाव निपटने के बाद आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी। 


देश की 6. 95 लाख वक्फ संपत्तियों पर बाजारू मूल्य से किराया निर्धारण हो : नकवी
रामपुर। सेंट्रल वक्फ काउंसिल के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता एजाज नकवी का कहना है कि सच्चर कमेटी की 2007 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में छह लाख पिचानवे हजार वक्फ संपत्तियां हैं। सुन्नी वक्फ एक लाख से अधिक तो शिया वक्फ 40 हजार एकड़ के आसपास संपत्तियां हैं। सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां उत्तर प्रदेश में हैं। इनमें पांच फीसदी कब्रगाह एरिया हैं, बाकी मस्जिद या ईदगाह और इमामबाड़ा हैं। अब तो कब्रगाह के किनारे भी दुकानें बनी हैं।  

नकवी का कहना है कि हमने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि भारत में दुनिया का सबसे मजबूत वक्फ कानून है, फिर भी फिर भी वक्फ संपत्तियां की रक्षा नहीं हो पा रही है। कहीं अवैध कब्जे हैं तो कहीं वक्फ लीज रूल का पालन नहीं हो रहा है। हमारी मांग है कि वक्फ संपत्तियों के एग्रीमेंट का बाजारू मूल्य के हिसाब से कराया जाना चाहिए। बाजारू मूल्य से किराया निर्धारण होगा तो वक्फ को फायदा पहुंचेगा। इससे होने वाली आय से गरीब, विधवा और मजलूमों की मदद हो सकेगी। लेकिन प्रदेशों में और केंद्रीय लीडरशिप वक्फ कानूनों का सही से पालन नहीं करा पा रही है। करीब सवा लाख एकड़ जमीनों का हर्जाना किसे मिलता है पता नहीं। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में हमने कहा था कि खरीद-फरोख्त व ट्रांसफर करने में साफगोई बरती जाए तो सरकार को फायदा होगा। कालाबाजारी कम होगी, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने कभी इसे तवज्जोह नहीं दी। हमारी मांग निरंतर जारी है, उम्मीद है कभी न कभी हमें कामयाबी मिलेगी। 
  
गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की तरह सख्ती हो
नकवी ने बताया कि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की तरह मार्केट रेट पर गुरुद्वारों की संपत्ति का किराया तय होना चाहिए, जिस तरह पारदर्शिता से वहां की संपत्ति का एग्रीमेंट होता है पैसे आते हैं और खर्च किए जाते हैं। ठीक इसी तरह वक्फ संपत्तियों का हिसाब-किताब होना चाहिए। लेकिन वक्फ संपत्तियों के एग्रीमेंट के दौरान पारदर्शिता नहीं होने से वक्फ संपत्तियों से नुकसान हो रहा है।

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