प्रयागराज : माघ मेला की तैयारी में विलंब से दंडी संन्यासी नाराज, छठवें पंटून पुल की मांग 

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स्वामी ब्रह्माश्रम ने कहा कि मेला प्रशासन को 25 दिसंबर तक पंटून पुल बनाकर तैयार कर देना चाहिए। 25 दिसंबर तक पंटून पुल बन जाने के बाद से मेला क्षेत्र की तैयारी जोर पकड़ती है।

प्रयागराज। संगम की रेती पर बसने वाले दुनिया के सबसे बड़े आध्याात्मिक और सांस्कृतिक माघ मेला के आयोजन में हो रहे विलंब पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद ने श्रद्धालुओं और कल्पवासियों के लिए पांच के अलावा छठवें पंटून पुल की मांग की है।

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अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम ने संतो और कल्पवासियों की सहूलियत को देखते हुए बुधवार को कहा कि प्रशासन को मेला क्षेत्र में गंगा पर छठवें पंटून पुल तैयार कराना चाहिए।

मेला क्षेत्र में पांच पांटून पुल ही तैयार कराए जाते है। उन्होने बताया कि प्रशासन मेला का क्षेत्रफल बढाता जा रहा है जबकि सुविधा उसके अनुरूप नहीं मिलती। उन्होने कहा कि मेला के दौरान पंटून पुल में अक्सर खराबी आ जाती है। इस कारण श्रद्धालुओं को चार या फिर तीन नंबर पंटून पुल से भेजा जाता है जिसके लिए उन्हें पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा का देखते हुए छठवें पुल को तैयार कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र उत्तर की तरफ बढ़ता जा रहा है। पहले ओल्ड जीटी तक क्षेत्रफल रहता था और अब उससे भी करीब ढाई से तीन किलोमीटर और बढ़ाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में एक अतिरिक्त पुल का निर्माण से श्रद्धालुओं को अनावाश्यक अधिक पैदल चलने से बचाया जा सकता है।

स्वामी ब्रह्माश्रम ने कहा कि मेला प्रशासन को 25 दिसंबर तक पंटून पुल बनाकर तैयार कर देना चाहिए। 25 दिसंबर तक पंटून पुल बन जाने के बाद से मेला क्षेत्र की तैयारी जोर पकड़ती है। अभी तक इसके पूरा नहीं होने से मेला क्षेत्र में भूमि आवंटन का कार्य पिछड़ जाएगा। उन्होने बताया कि माघ मेले का पहला स्नान पौष मास की पूर्णिमा छह जनवरी 2023 को होगा। जबकि मेले का सामापन 18 फरवरी को महाशिवरात्रि स्नान पर्व के अवसर पर होगा।

इसके अलावा माघ मेले का दूसरा स्नान पर्व मकर संक्रांति- 14 और 15 जनवरी, तीसरा स्नान पर्व मौनी अमावस्य- 21 जनवरी, चौथा स्नान पर्व माघी पूर्णिमा- 05 फरवरी और अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि को होगा। इसी स्नान के बाद मेला का समापन हो जाएगा।

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