नोटबंदी को लेकर अधीर ने लोकसभा में सरकार पर निशाना साधा, निशिकांत दुबे ने किया पलटवार

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नई दिल्ली लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने नोटबंदी के संदर्भ में शुक्रवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस कदम के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन उद्देश्यों का उल्लेख किया था उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ।

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के कारण काला धन बढ़ा है और वह काला धन रखने वालों का समर्थन करती है। चौधरी ने सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया, ‘‘देश के आर्थिक हालात जर्जर हो चुके हैं। इसका मुख्य कारण बिना सोचे-समझे नोटबंदी लागू करना है। आज साबित हो गया है कि नोटबंदी का एक भी मकसद पूरा नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि काला धन वापस आएगा, जाली नोट नहीं बचेंगे, आतंकवाद खत्म हो जाएगा। एक भी बात पूरी नहीं हुई।’’

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के समय देश में 18 लाख करोड़ रुपये नकदी चलन में थी जो अब 30 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। इसके बाद निशिकांत दुबे ने कहा कि नोटबंदी के बारे में रिजर्व बैंक ने बताया कि यह कदम सोच-समझकर उठाया गया था। उन्होंने दावा किया, ‘‘कांग्रेस के कारण काला धन बढ़ गया। कांग्रेस भ्रष्टाचारियों, बांग्लादेशियों के साथ है। यह टुकड़े-टुकड़े गैंगका समर्थन करती है।’’

शून्यकाल के दौरान बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने कहा कि जितने भी स्वतंत्रता सेनानी जीवित हैं उनका सम्मान तो अमृतकालमें होना ही चाहिए, साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को देशभक्तों के परिवारके रूप में पहचान पत्र दिया जाना चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने सरकार से सेबों की पैकेजिंग से जीएसटी हटाने की मांग की और कहा कि सेब बागबानों और व्यापारियों को राहत दी जानी चाहिए।

कांग्रेस के कोडिकुनिल सुरेश ने प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से जुड़ा विषय उठाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों वर्गों के कक्षा आठ तक के बच्चों को छात्रवृत्ति से उपेक्षित किया गया है जो भेदभाव वाला फैसला है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और इन वर्गों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति को बहाल किया जाए। भाजपा के सुशील कुमार सिंह, कनक मल कटारा, कांग्रेस के मनीष तिवारी और कुछ अन्य सदस्यों ने लोक महत्व के अलग-अलग मुद्दे शून्यकाल में उठाए।

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