बरेली: दोबारा चिकित्सा क्षतिपूर्ति लेने की कोशिश, दो क्लर्क समेत तीन निलंबित
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में क्लर्को की मनमानी पर नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने सख्त रुख अपनाया है। चिकित्सा क्षतिपूर्ति (मेडिक्लेम) लेने के मामलों में गोलमाल पकड़ने के बाद कर समाहर्ता के साथ दो क्लर्कों को निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधीक्षक को कर समाहर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के भी आदेश दिए हैं। कार्रवाई की जद में आने वालों में एक स्वास्थ्य पटल के वरिष्ठ सहायक और टैक्स पटल का क्लर्क भी शामिल है।
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टैक्स विभाग में तैनात कर समाहर्ता रवि कुमार ने 15 जुलाई 2022 को चिकित्सकीय क्षतिपूर्ति के रूप में 21 हजार 390 रुपये लिए थे। अब दोबारा भुगतान करने के लिए उसी फाइल को पेश किया गया। इस कार्य को टैक्स क्लर्क विशाल के जरिये आगे बढ़ाया गया। बताया जा रहा है कि विशाल ने कुछ समय पहले ही चार्ज संभाला था, इसलिए वह इस धोखाधड़ी को जान नहीं पाया और फाइल को आगे बढ़ा दी। फाइल सभी जगह से होते हुए अंतिम चरण में जब मुख्य नगर लेखा परीक्षक सत्येन्द्र सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने यह मामला पकड़ लिया।
उन्होंने टिप्पणी में इस प्रकरण में कार्यालय अधीक्षक, संबंधित लिपिक व अन्य के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए नगर आयुक्त को फाइल भेज दी। नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने अपनी टिप्पणी चार बिंदुओं में दर्ज करते हुए निर्देश दिए कि तत्काल कर समाहर्ता और लिपिक को निलंबित कर दिया जाए।
दोनों पर विभागीय कार्यवाही की जाए। कार्यालय अधीक्षक, उक्त कर समाहर्ता के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराएं। साथ ही पूर्व में स्वीकृत सभी मेडीक्लेम की जांच को समिति बनाएं, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी। इसके अलावा एक और वरिष्ठ क्लर्क नासिर बेग को भी निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। निगम सूत्रों ने बताया कि नासिर बेग के मामले में अफसरों ने ही फाइल को दबाए रखा था और अब खुद को बचाने के लिए लिपिक को बलि का बकरा बना दिया है।
सितंबर के मामले में अब हुई कार्रवाई
निगम के सूत्रों ने बताया कि 12 सितंबर 2022 का मामला था। स्वास्थ्य विभाग के चालक राजेश 12 सितंबर को बाकरगंज में कूड़ा डालकर वापस आ रहा था। तभी गाड़ी लगने से रेलवे का फाटक टूट गया था। इस पर आरपीएफ ने राजेश का चालान कर दिया। सफाई निरीक्षक राकेश गंगवार ने मामले की रिपोर्ट देते हुए चालक के जेल में होने की बात कही थी। सूत्रों के अनुसार संबंधित वरिष्ठ सहायक नासिर बेग ने उसी फाइल को नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास भेजा तो उन्होंने जेल से रिपोर्ट मंगवाने के निर्देश दिए।
मामले में जेल से रिपोर्ट मंगवाई गई तो वह 17 को निगम में आई और अफसरों से मार्क होते हुए 20 सितंबर को नासिर के पास पहुंची थी। उन्होंने अफसरों द्वारा कार्रवाई करने के लिए पत्रावली उसी समय भेज दी थी लेकिन रिपोर्ट से पहले मुख्य लेखा परीक्षक ने मामला पकड़ लिया और कहा कि इस प्रकरण में भी संबंधित क्लर्क की भी गलती है। क्लर्क किसी को निलंबित कैसे कर सकता है। इधर नासिर बेग का कहना है कि पत्रावली चलाने में उनकी कोई गलती नहीं है। अफसर पूछेंगे तो बता देंगे। अभी निलंबन का आदेश नहीं मिला है।
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