नहीं रहे बरेली बार एसोसिएशन के भीष्म पितामह घनश्याम शर्मा, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों में शोक की लहर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। बरेली बार एसोसिएशन के पितामह कहे जाने वाले पूर्व अध्यक्ष व सचिव वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम शर्मा को आज एडीजी 14 से होकर एडीजी 6 में जाते समय हार्ट अटैक पड़ा। जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जब इसकी सूचना अधिवक्ताओं और समाजसेवियों को लगी तो उनके घर पर आने जाने वालों का तांता लग गया। किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि वह सभी को छोड़ कर इस संसार से चले गए। 

ये भी पढ़ें- बरेली: 18 जनवरी को बरेली में होगी इन्वेस्टर्स समिट, 4000 करोड़ के निवेशक जुटेंगे

बार एसोसिएशन के 17 बार अध्यक्ष व एक बार सचिव रहे 72 वर्षीय घनश्याम शर्मा बारादरी के होली चौक के पास रहते थे। उन्होंने सन 1976 में वकालत करने के बाद प्रैक्टिस शुरू कर दी और फिर इस क्षेत्र में अपनी ईमानदारी व कुशल कार्यशैली से सभी के बीच अपनी अलग पहचान बना ली। उसके बाद लगातार 17 बार वह बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक बार सचिव रहे। उनके बाद जो भी अध्यक्ष बना उसने इनके ही सानिध्य में काम किया। 

आज दोपहर को रोजाना की तरह वह केस के सिलिसले में एडीजी 14 से होकर एडीजी 6 के यहां जा रहे थे। अचानक उनको हार्ट अटैक पड़ गया। उनके जूनियर अधिवक्ता मनोज बाजपेई ने बताया तुरंत ही उनको सभी लोग अस्पताल ले कर दौड़े जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जैसे ही अधिवक्ताओं को इसका पता चला शोक की लहर दौड़ गई। शहर के सभी पार्टियों के नेता व समाजसेवी उनके घर पर पहुंचने लगे। अधिवक्ताओं ने बताया कि उनके खत्म होने से एक युग का अंत हो गया। वह हम सब के भीष्म पितामाह थे। अधिवक्ता समाज को बहुत बड़ी क्षति हुई है। जिसकी कभी भरपाई नहीं हो पाएगी। शर्मा अपने परिवार के पीछे पत्नी लता शर्मा व दो बेटे एडवोकेट सचिन शर्मा और वैभव शर्मा को छोड़ गए हैं। 

अधिवक्ताओं की कई समस्याओं का कराया था समाधान 
वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम शर्मा बरेली के नामी अधिवक्ताओं में शामिल थे। इसके साथ ही वह अपने सरल स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे। अपने विरोधियों से भी हमेशा मित्रता निभाते थे। सन 2020 तक वह लगातार अध्यक्ष पद पर बने रहे। उसके बाद जब वह हारे थे जो भी अध्यक्ष बना उनके मार्ग दर्शन में ही बार के सारे काम होते थे। अधिवक्ताओं की बड़ी से बड़ी समस्याओं का उन्होंने चुटकियों में समाधान करा दिया था। अधिवक्ता होने के साथ ही वह समाजसेवी भी थे। उन्होंने कई बार लोगों की आर्थिक मदद की। यहां तक की कई सामाजिक संगठनों से वह जुड़े रहे और समाजसेवा के कार्य किए। उनकी इस क्षति पर सभी को भारी दुख है।

ये भी पढ़ें- बरेली : छुट्टा पशुओं के आतंक से परेशान किसान, कांग्रेसियों ने उठाई समाधान की मांग

 

संबंधित समाचार