बरेली: 80 हजार को भेजा नोटिस, आपत्ति दर्ज कराने सिर्फ 300 पहुंचे

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

टैक्स में बढ़ोत्तरी का मामला, जीआईएस सर्वे में सामने आ रही हैं छूटी हुई संपत्तियां, नगर निगम के राजस्व में होगी वृद्धि

सर्वे में दर्ज होने के बाद निगम की टैक्स व्यवस्था में घपलेबाजी की आशंका कम

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम ने शहर के 47 वार्ड के 80 हजार लोगों को नोटिस भेजे हैं। यह नोटिस उन्हीं लोगों को भेजे गए हैं, जिनके टैक्स में कुछ बढ़ोत्तरी हुई है। यानी पहले टैक्स कम आ रहा था अब उनका टैक्स बढ़ गया है। टैक्स क्यों बढ़ा, इसकी जानकारी करने के लिए इन नोटिसों को भेजा गया। नोटिस पाकर कुछ लोगों ने इसे कागज का टुकड़ा समझकर एक तरफ रख लिया, लेकिन कुछ जागरूक लोगों ने निगम में आकर नोटिस पर दर्ज बढ़े टैक्स पर आपत्ति जताई। निगम ने उनकी आपत्तियों का निस्तारण किया। इससे कई लोगों के बिल की गलती सुधारी गई तो तमाम लोगों के तर्क निष्प्रभावी हुए हैं।

माना जा रहा है अगले वित्तीय वर्ष से शहरवासी नोटिस में दर्ज टैक्स राशि को भरेंगे। जीआईएस सर्वे के बाद निगम ने लगभग 80 हजार लोगों को नोटिस भेजे थे। इनमें करीब 300 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई। उनकी आपत्तियों की सुनवाई की गई। कुर्मांचल नगर से आए एक आवंटी ने नोटिस में दर्ज हाउस और वाटर टैक्स को सही बताया। उन्हें आपत्ति इस बात पर भी थी कि उनके क्षेत्र में सीवर लाइन है नहीं, लेकिन टैक्स लगाकर भेज दिया गया है। इसे समाप्त करने की बात उन्होंने अफसरों से कही। उन्हें बताया गया कि यदि 100 मीटर के दायरे में निगम की सीवर या पाइप लाइन जा रही है तो आवंटी ने कनेक्शन लिया हो या नहीं उसे टैक्स देना होगा। यह निगम के अधिनियम में है।

जिन आवंटियों को नोटिस में आपत्तियां हुईं, उसमें अमूमन एक तरह की ही समस्या थी। सीवर लाइन नहीं होते हुए सीवर टैक्स लगना, किसी को गृह संपत्ति का वार्षिक मूल्य (एनुअल रेंटल वेल्यू) में संशोधन,या टैक्स में बढ़ोत्तरी होने की शिकायत थी। जीआईएस सर्वे में संपत्ति की फोटो दिखाकर आपत्तिकर्ता को संतुष्ट किया गया। बताया गया कि पहले संपत्ति पर एक मंजिल बनी थी अब उसमें दो मंजिल निर्माण कराया गया है। इसलिए उसका मूल्य लगाया गया तो टैक्स बढ़ गया है। कुछ लोग संपत्ति के वार्षिक मूल्य में संशोधन कराने को कहते तो उनसे रजिस्ट्री की फोटो कापी मांगी गई। रजिस्ट्री में संपत्ति की माप ज्यादा थी, जबकि टैक्स कम माप पर लगाया जा रहा था। ऐसे में आपत्ति खारिज हो गई। ऐसा नहीं है कि सभी आपत्तियां सर्वे में ठीक हैं। सीवर लाइन टैक्स के कई मामले सही पाए गए तो उस टैक्स को हटाया भी गया है।

नगर निगम में दर्ज हुई संपत्ति, टैक्स में नहीं हो सकेगा घपला
जीआईएस सर्वे में कई संपत्तियां ऐसी सामने आई हैं जिनमें टैक्स कम लग रहा था। कई ऐसी भी हैं, जहां टैक्स लगा ही नहीं था। सर्वे के बाद सभी संपत्तियां दर्ज हो गई हैं। इसलिए टैक्स में घपलेबाजी की आशंका कम हो गई है। पीलीभीत बाईपास के एक मॉल में टैक्स कई साल से कम लग रहा था। इसकी माप कराई गई तो खुले क्षेत्र का टैक्स नहीं लग रहा था। अब इसका टैक्स भी आएगा। पटेल चौक पर एक कांप्लेक्स में चार मंजिल में से दो मंजिल का टैक्स ही नहीं लगा था। अब इसका टैक्स लगेगा। केवल दो मामलों में ही निगम को लाखों की टैक्स वृद्धि हो गई है।

ये भी पढ़ें- बरेली: एनक्यूएएस सर्वे शुरू, अफसरों की अटकी रहीं सांसें

संबंधित समाचार