बरेली: उजागर किया भ्रष्टाचार, अब जान देना चाहता है ठेकेदार
राष्ट्रपति को पत्र लिखकर ठेकेदार ने मांगी इच्छा मृत्यु की इजाजत, 13 महीने में ही अफसरों ने एमए बिल्डर को दे दिए गए थे 33 काम
बरेली, अमृत विचार। पीडब्ल्यूडी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला ठेकेदार अब जान देना चाहता है। उसने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है। व्यथा भ्रष्टाचार के आरोपों की उप लोकायुक्त की जांच में पुष्टि होने के बावजूद दोषी पाए गए उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई न होने की है। इनमें प्रमुख मामला बरेली की एमए बिल्डर फर्म को 13 महीने में 33 ठेके देने का था। आहत ठेकेदार ने अपनी जान को खतरा बताते हुए मुख्य अभियंता को भी मांग पत्र दिया है।
बदायूं के ठेकेदार सतीश चंद्र दीक्षित ने लोकायुक्त से पीलीभीत में बौनी गांव के पास रपटऊआ नाले पर आरसीसी पुल बनाने के टेंडर में घपला किए जाने की शिकायत की थी। आरोप था कि जनवरी 2021 में पुल निर्माण का करीब पांच करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया। पहली बार में टेंडर प्रहरी पोर्टल पर निरस्त हो गया। दूसरी बार टेंडर निकला तो उनके साथ एएम बिल्डर ने टेंडर भरा लेकिन ठेकेदार की शिकायत पर यह टेंडर निरस्त कर दिया गया। तीसरी बार फिर टेंडर निकाला जिसमें एएम बिल्डर, सतीश समेत तीन फर्म ने हिस्सा लिया मगर इस बार 16 मार्च को बरेली के अधिकारियों ने उनके टेंडर निरस्त करने की संस्तुति कर दी।
उनकी शिकायत पर मामले की जांच की गई। 20 मार्च को लखनऊ की हायर कमेटी में शामिल दो मुख्य अभियंता और दो अधीक्षण अभियंता ने तीनों टेंडर पास कर दिए। आरोप है कि एएम बिल्डर की फर्जी शिकायत पर ये टेंडर फिर निरस्त कर दिए गए। चौथी बार फिर दो टेंडर एसई की संस्तुति पर निरस्त कर दिए गए। पांचवीं बार में एएम बिल्डर का सिंगल टेंडर 45 लाख रुपये बढ़ाकर 22 जुलाई को तत्कालीन मुख्य अभियंता ने मंजूर कर दिया।
लोकायुक्त की जांच में 17 बिंदुओं पर की गई शिकायत के अधिकांश आरोपों की पुष्टि हो गई। इसमें प्रथमदृष्टया लखनऊ और बरेली के दो पूर्व चीफ इंजीनियर, अधिशासी अभियंता समेत छह लोगों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई लेकिन दोबारा जांच के नाम पर मामला दबा दिया। इससे आहत सतीश चंद्र ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जान को खतरा बताया है, साथ ही इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है।
मामला गंभीर है। सतीश चंद्र दीक्षित की शिकायत पर जांच चल रही है। लोकायुक्त की जांच में आए बिंदुओं को लेकर भी संबंधित अधिशासी अभियंताओं से आख्या देने को कहा गया है। आख्या मिलने पर उसका परीक्षण किया जाएगा। इसके उपरांत ही आगे कार्रवाई की जाएगी। संजय कुमार तिवारी, मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी।
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