बाजपुर: विभिन्न मांगों को लेकर भोजन माताओं ने किया प्रदर्शन
बाजपुर, अमृत विचार। न्यूनतम वेतन लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर भोजन माताएं मुखर हो गई हैं। उन्होंने प्रगतिशील भोजन माता संगठन के बैनर तले जुलूस निकालकर भगत सिंह चौक पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। साथ ही क्षेत्रीय विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी प्रेषित किया।
रविवार को काफी संख्या में भोजन माताएं जुलूस की शक्ल में शहीद भगत सिंह चौक पर पहुंची और मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर जोरदार नारेबाजी की। ज्ञापन में न्यूनतम वेतन लागू करने, भोजनमाताओं को स्थाई करने, शिक्षा सचिव द्वारा भेजे गए 5000 रुपये के प्रस्ताव को तत्काल लागू करने, भोजनमाताओं से अतिरिक्त न करवाने, भोजनमाताओं को बोनस और ड्रेस समय पर देने, भोजन माताओं का हर माह का मानदेय नियमित समय पर देने, हर स्कूल में गैस चूल्हे का बंदोबस्त कर भोजनमाताओं को धुएं से मुक्त करने, अक्षय पात्र फाउंडेशन पर रोक लगाने तथा ईएसआई, पीएफ, पेंशन, प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं लागू करने की मांग की गई है।
भोजन माता रेखा ने कहा कि हम पिछले 20-21 वर्षों से विद्यालयों में भोजन बनाने का कार्य कर रही हैं। जिसका हमें मात्र 3000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है, जोकि बढ़ती महंगाई के दौर में नाकाफी है। कई भोजनमाताओं का पूरा परिवार इसी में गुजारा करने को मजबूर है।मंजू ने कहा कि विद्यालयों में हमसे भोजन बनाने, बच्चों को भोजन वितरण करने, किचन की सफाई करने के अलावा चुतर्थ श्रेणी कर्मचारी, माली, सफाई कर्मचारी आदि का कार्य भी करवाया जा रहा है जिसका हमें कोई भुगतान नहीं किया जाता।
संगीता ने कहा कि उत्तराखंड में लगभग 25 हजार भोजनमाताएं हैं जिनको उत्तराखंड सरकार ने भोजनमाता शब्द से नवाजा है, ऐसे में माता को सम्मान मिलना चाहिए, वो सरकार को सोचना चाहिए। वर्ष 2022 में उत्तराखंड के शिक्षा सचिव ने भोजनमाताओं का पांच हजार रुपये मानदेय करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था, परंतु उस प्रस्ताव पर अभी तक अमल नहीं किया गया है। कहा कि यदि जल्द ही हमारी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो हम भोजनमाताएं आंदोलन को बाध्य होंगी। इस मौके पर शोभा, आरती, रेखा, मंजु, कमलेश, बीना, मुन्नी, संगीता, आशा, मंजु देवी, मंगो आदि मौजूद थी।
