गलती होना नहीं, गलती सुधारना है बड़ी बात है :आचार्य विमलेश

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गंगा तट पर राजघाट में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन

हरदोई, अमृत विचार। कथा व्यास आचार्य विमलेश दीक्षित महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। बड़ी बात तो है उस गलती को जीवन भर के लिए सुधार लेना। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते प्रायश्चित ज़रूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।

कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कथा व्यास आचार्य ने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है।

उन्होंने कहा कि यह कल्पवृक्ष के समान है। भागवत कथा ही साक्षात कृष्ण है,और जो कृष्ण है,वही साक्षात भागवत है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि भक्ति को पाने का यदि इस धरा धाम पर कोई साधन है तो केवल भगवान की लीलाएं हैं। भगवान के कार्य करने पर मनुष्य जीवन में धीरे-धीरे स्वतविकपन आता है। मनुष्य उस पथ का पथिक बन जाता है। वह समाज को एक आदर्श पुरुष के रूप में जीवन को व्यतीत करता है। उसके इस गुण की वजह से वह दूसरों को भी इस मार्ग पर ले आता है। यही भागवत जीवन को सही तरीके से जीने का सबसे सरलतम बिहारी जी के  संगीतमय भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर कथा परीक्षित विमला देवी शंकर बक्श सिंह पोथी पूजन करके आरती उतारी गई।

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