मुरादाबाद : बिजनौर से दिल्ली की रेल कनेक्टिविटी को जल्द मिलेगी रफ्तार

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Published By Bhawna
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जून तक पूरा हो जाएगा बिजनौर से हस्तिनापुर होकर मेरठ के लिए सर्वेक्षण का कार्य

मुरादाबाद, अमृत विचार। रेल मंडल के बिजनौर से दिल्ली की रेल कनेक्टविटी को रफ्तार मिलने वाली हैं। बिजनौर से हस्तिनापुर होकर मेरठ के लिए सर्वेक्षण का कार्य जून तक पूरा हो जाएगा। फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए रेलवे की ओर से 1.58 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

केंद्र सरकार का मुरादाबाद रेल मंडल पर खास फोकस है। सरकार की प्राथमिकता बिजनौर व नगीना लोकसभा क्षेत्रों में रेल नेटवर्क का सुधार है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले साल 23-24 अगस्त को बिजनौर, धामपुर व नगीना क्षेत्रों का जाएजा लिया था। जिसके बाद बिजनौर- हस्तिनापुर-मेरठ नई रेललाइन बिछाने की योजना को मंजूरी मिल गई। दौरे के फौरन बाद उत्तर रेलवे ने एफएलएस (फाइनल लोकेशन सर्वे) के लिए 1.58 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी। नई रेल लाइन 63.5 किमी लंबी होगी। इसका सर्वे का कार्य रेलवे जून तक पूरा कर लेगा। कोशिश की जा रही है कि अगले साल चुनाव से पहले बिजनौर से कनेक्टिविटी का काम शुरू हो जाए। 

रेलवे प्रशासन की माने तो नई रेललाइन से बिजनौर की दिल्ली से नजदीकी बढ़ जाएगी। अभी बस से बिजनौर से मेरठ की दूरी 80 किमी है। इसमें दो घंटे का समय लगता है। पर नई रेललाइन 63.5 किमी लंबी है। ट्रेन से यह फासला तय होने में कम समय लगेगा। रेल लाइन दौराला, बिजनौर, मवाना, हस्तिनापुर, बहसुमा समेत अन्य मार्गों से गुजरेगी। वहीं नई रेल लाइन से तीर्थस्थल हस्तिनापुर पर्यटन के रूप में विकसित होगा। नई रेललाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का काम तेज है। रेलवे ट्रैक के संचालित होने से बिजनौर दिल्ली व लखनऊ से सीधी कनेक्टिविटी से जुड़ जाएगा। हालांकि लखनऊ से बिजनौर होकर चंडीगढ़ के लिए इंटरसिटी समेत चुनिंदा ट्रेनें हैं।

मंडल के बिजनौर-मेरठ रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा होने बाद जून में सर्वे रिपोर्ट भेजी जाएगी। रेल मुख्यालय सर्वे के आधार पर अगला निर्णय लेगा। सर्वे के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का बजट पहले ही जारी किया गया था।-अजय नंदन, डीआरएम

पहली हाईड्रोजन ट्रेन का ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलखंड पर होगा संचालन
मुरादाबाद। इसी साल दिसंबर तक देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनों को सबसे पहले हेरीटेज सेक्शन (ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों) में चलाया जाएगा। जिसके तहत शुरूआत में यह ट्रेन कालका-शिमला मार्ग पर चलेगी। इसके बाद ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलखंड पर भी इस ट्रेन का संचालन होगा। फिलहाल रेलवे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुटा है। जिसके लिए 125 किमी रेललाइन बिछा दी गई है। जबकि कई सुरंगों में पटरियां बिछाने का काम चल रहा है। जिसके बाद चारधाम की यात्रा ट्रेन से की जा सकेगी। रेलवे ने इस रूट पर अत्याधुनिक विस्टाडोम कोच वाली ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की है। इन कोचों की छत शीशे की होगी। इससे यात्री पहाड़ी दृश्यों का आनंद ले सकेंगे।

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