रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश के सौदे पर काम चालू है : सऊदी अरामको

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नई दिल्ली। तेल कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में आई कमी के बावजूद वह अभी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में 15 अरब डॉलर निवेश के सौदे पर काम कर रही है। इस संदर्भ में अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन …

नई दिल्ली। तेल कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में आई कमी के बावजूद वह अभी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में 15 अरब डॉलर निवेश के सौदे पर काम कर रही है। इस संदर्भ में अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासर ने कंपनी के तिमाही नतीजों की घोषणा करते समय कहा, रिलायंस के साथ हमारी बातचीत जारी है, हम रिलायंस डील के बारे में अपने शेयरधारकों को उचित समय पर अपडेट करेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की जुलाई में हुई 43वीं वार्षिक आम बैठक में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा था कि कोविड-19 महामारी के चलते बनी अभूतपूर्व परिस्थितियों के चलते सऊदी अरामको के साथ प्रस्तावित डील समय से नहीं हो पा रही है, लेकिन हम सऊदी अरामको के साथ अपने दो दशक से ज्यादा के कारोबारी संबंधों का सम्मान करते हैं और उसके साथ लंबी अवधि की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं।

आरआईएल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भी कहा है कि सऊदी अरामको के साथ सौदे पर बातचीत चल रही है। सौदा होने के बाद सऊदी अरामको की एडवांस टेक्नोलॉजी का लाभ आरआईएल को मिलेगा। सौदे में देरी की वजह से इसके रद्द होने की आशंका जताई जा रही थी। अरामको के सीईओ ने अब सौदा रद्द होने की सभी आशंकाओं पर विराम लगा दिया है।

मुकेश अंबानी अब दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। उन्होंने पिछले साल अरामको के सौदे के बारे में जानकारी दी थी। तब उन्होंने कहा था कि रिलायंस के रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स कारोबार में अरामको 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए निवेश कर सकती है।

रिलायंस के साथ यह डील सऊदी अरामको के लिए भी महत्वपूर्ण है। अरामको दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का निर्यातक है। रिलायंस के साथ सौदा कर वह रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में अपनी स्थिती मजबूत करना चाहता है।

सऊदी अरामको ने रविवार को बताया कि तिमाही की शुद्ध आय एक साल पहले की तुलना में लगभग 75 फीसदी कम रही। कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 33 फीसदी की गिरावट इसकी वजह रही। कोरोना वायरस महामारी ने व्यापार और यात्राओं को रोक दिया है, जिससे ईंधन की मांग में कमी आई है।

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