रानीखेतः हटा लो अतिक्रमण वरना रह जाओगे चुनाव लड़ने और वोट ड़ालने से वंचित
रानीखेत, अमृत विचार। छावनी परिषदों में चुनावी अधिसूचना जारी होने के बाद आचार संहिता लागू कर दी गई है। विभिन्न राज्यों की 57 पदों के साथ ही उत्तराखंड के 9 कैंट बोर्ड क्षेत्रों में अतिक्रमणकारी और अवैध निर्माण करने वालों का चिन्हित कर अभियान भी तेज हो गया है, जिसके चलते कुमाऊं की सबसे बड़ी रानीखेत छावनी में वर्तमान समय तक 400 से ज्यादा अतिक्रमणकारी चिन्हित किए जा चुके हैं। ऐसे में यह लोग ना तो चुनाव भी लड़ पाएंगे और न ही मतदान कर पाएंगे। ऐसे में कई संभावित उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा। वहीं, छावनी के मुख्य अधिशासी अधिकारी नागेश पांडे ने कहा कि न्यायालय के आदेश का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा।
गौरतलब है कि पंचमढ़ी कैंट बोर्ड मध्य प्रदेश के एक नागरिक की याचिका पर सुनवाई के बाद वहां के उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि छावनी क्षेत्र में अतिक्रमण करने वालों के नाम हटाकर नई संशोधित मतदाता सूची बनाई जाए। पंचमढ़ी कैंट बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल करने पर उच्चतम न्यायालय ने भी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, जिसके चलते इस फैसले को गाइडलाइन के रूप में अमल में लाकर देश के छावनी परिषदों में अवैध निर्माण करने व अतिक्रमण करने वालों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।
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रानीखेत कैंट सभी 9 बोर्ड क्षेत्र में पंचमढ़ी प्रकरण पर न्यायालय के आदेश को कड़ाई से लागू करने में जुट गई हैं। लगभग 10 हजार की आबादी वाले रानीखेत छावनी परिषद के 7 वार्डों में सैकड़ों अतिक्रमणकारी चिन्हित किए जा चुके हैं। मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। छावनी के इस फरमान से कई संभावित उम्मीदवारों को झटका लगा है। छावनी द्वारा इस तरह की कार्रवाई नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो भी उम्मीदवार अंदरखाने आचार संहिता लगते ही चुनाव की तैयारी में जुट गए थे वह भी अब सदमें में आ गए हैं।
न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा। कैंट पहले ही अतिक्रमणकारियों के नाम कटवा चुकी है। कैंट बोर्ड के इलेक्ट्रॉल में ऐसे लोगों के नाम दर्ज नहीं हैं। जल्द ही निर्वाचन प्रक्रिया के लिए कार्यक्रम निर्धारित कर दिया जाएगा- नागेश पांडे, मुख्य अधिशासी अधिकारी, कैंट बोर्ड रानीखेत।
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