हल्द्वानी: ख्वाहिशें लेकर आया मजदूर बेटा, होली में घर वापस ना जा सका
आड़े आई दौलत, बेटे की लाश साथ नेपाल नहीं ले जा सका गरीब पिता
गरीब परिवार को पालने के लिए नेपाल से भारत मजदूरी करने आया था बेटा नौ दिन पोस्टमार्टम में पड़ी रही लाश, नहीं आया परिवार, दोस्तों ने किया अंतिम संस्कार
हल्द्वानी, अमृत विचार। परिवार गरीब था और उसे पालने की जिम्मेदारी 30 साल के सुनील पर थी। परिवार की ख्वाहिशें पूरी करने के लिए सुनील नेपाल से भारत आ गया और मजदूरी करने लगा, लेकिन एक हादसे में उसकी मौत हो गई।
लाश नौ दिन तक हल्द्वानी में पोस्टमार्टम हाउस में पड़ी रही, लेकिन परिवार नहीं आया। वजह की गरीब पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे नेपाल से भारत आते और फिर बेटे की लाश को नेपाल ले जा पाते।
मूलरूप से फूलचौरा जुमला नेपाल निवासी सुनील (36) पुत्र दाव सिंह पिथौरागढ़ के बंगापानी में रहता था। सुनील के दोस्त विक्रम दाल ने बताया कि वह दोनों बंगापानी में मजदूरी करते थे। सुनील का परिवार बेहद गरीब है और इसी गरीबी को दूर करने के लिए सुनील ने बंगापानी में मजदूरी शुरू की थी।
बीती 21 फरवरी को सीढ़ियों से उतरते वक्त विक्रम गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे आनन-फानन में सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहां हालत नाजुक होने पर उसे सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। 22 फरवरी को सुनील की मौत हो गई।
जिसके बाद विक्रम ने इसकी सूचना सुनील ने परिजनों को दी। बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। विक्रम ने सुनील के परिवार को भारत आने के लिए कहा, लेकिन आने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
विक्रम के अनुसार, पुलिस ने भी सुनील के परिजनों से आकर शव ले जाने को कहा, लेकिन वह नहीं आए। इस दौरान लाश पहले मॉर्चरी और फिर पोस्टमार्टम के बाद पोस्टमार्टम हाउस में पड़ी रही। परिवार के न आने पर शुक्रवार को विक्रम और पुलिस कर्मियों ने उसका अंतिम संस्कार किया। विक्रम के मुताबिक सुनील का परिवार बेहद गरीब है। संभवत: पैसे न होने की वजह से वह बेटे की लाश लेने नहीं आए।
