शाहजहांपुर: सनातन परंपरा में गृहस्थ जीवन का है सर्वोच्च स्थान- राज्यपाल आरिफ मोहम्मद
शाहजहांपुर, अमृत विचार। युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं से प्रेरित केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि शाहजहांपुर सिर्फ शिक्षा ही नहीं, अपितु आध्यात्मक और अमर शहीदों की सरजमीं है। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि सिर्फ सिद्धांतों को जान लेना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना और आत्मसात करना भी जरूरी है।
वह स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि युवाओं को दीक्षा दे रहे थे। अपने संबोधन में केरल के राज्यपाल ने कई बार स्वामी विवेकानंद के विचारों का भी उल्लेख किया। कहा: हमें अपने माता-पिता का त्याग जरूर महसूस करना चाहिए, क्योंकि वही बच्चों की बुनियाद बनाते हैं।
उन्होंने कहा की जीवन में विधि का बहुत महत्व है, छात्र जीवन में नहीं, तो बाद में इसे पढ़ना ही पड़ता है। जिन माता-पिता ने बच्चों को अभी से विधि की शिक्षा दिला दी है, वह बधाई के पात्र हैं। उन्होंने शिक्षा का पहला चरण गृहस्थ आश्रम से जोड़ते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन हमारी सनातन परंपरा में सबसे ऊपर रखा गया है। गृहस्थ जीवन जीने का तरीका समझाते हुए राज्यपाल ने कहा कि जिस तरह हम पूजा-अर्चना के लिए बैठते हैं, तीर्थयात्रा में जाते हैं, वैसी ही भावना के साथ अपने कर्म को ब्रह्म को समर्पित करना चाहिए। जिस तरह पूजा-पाठ में मिलावट नहीं की जाती, उसी तरह गृहस्थ जीवन में भी पवित्रता होनी चाहिए।
प्रखर और विद्वान वक्ता आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि शिक्षा मनुष्य को सशक्त बनाने का माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से मानवीय मूल्यों की चेतना जागृत करें और शिक्षा रूपी हथियार को समाजहित में उपयोग में लाने का प्रयास करें। हमें अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को जीवित रखने के लिए आपसी भाईचारा को भी कायम रखना होगा।
इससे पहले मुख्य वक्ता राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रोफेसर बलराज सिंह चौहान ने पूरा भाषण अंग्रेजी में ही दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वह जीवन मूल्यों से कभी समझौता न करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने दीक्षोपदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, उनका सामना करते हुए इंसाफ को जिंदा रखना विधि छात्रों का उद्देश्य होना चाहिए।
समाज में इंसाफ और विश्वास कभी नहीं मरना चाहिए। संचालन प्रोफेसर अनुराग अग्रवाल ने किया। समारोह का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर और पुष्पार्चन से किया। संगीत संकाय की छात्राओं ने डॉ. कविता भटनाकर के नेतृत्व में राष्ट्रगान और कुल गीत प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के विधि संकाय अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने दिया। लॉ कालेज के प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा ने महाविद्यालय की तीन वर्ष की प्रगति आख्या प्रस्तुत की।
इस मौके पर डीएम उमेश प्रताप सिंह, एसपी एस आनंद, सीडीओ एसबी सिंह, एडीएम प्रशासन संजय पांडेय, एडीएम वित्त त्रिभुवन, सिटी मजिस्ट्रेट आशीष कुमार सिंह, कुल सचिव डॉ. राजीव कुमार, यूपी बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह अमर कंटक मध्य प्रदेश के महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, प्रबंध समिति से जुड़े रामचंद्र सिंघल, सुरेश सिंघल, पूर्व विधायक देवेंद्र पाल सिंह, पूर्व राज्यमंत्री अवधेश वर्मा आदि मौजूद रहे।
उपाधि देकर राज्यपाल ने पहनाए गोल्ड मेडल
एसएस लॉ कालेज के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने वर्ष 2020 के टॉपर अभिनव दीक्षित, हर्ष त्रिपाठी, राखी देवी, 2021 के टॉपर अनुगुंज, कशिश तिवारी, बिलाल हसन को उपाधि के साथ गोल्ड मेडल प्रदान किए। इसी कड़ी में एनसीसी कैडेट आकांक्षा मिश्रा और एसएसएमवी के टॉपर यश गुप्ता को गोल्ड मेडल और प्रशस्तिपत्र प्रदान किया। लॉ कालेज की प्रथम छात्रा के रूप में कोमल गुप्ता का पुरस्कार अपर्णा चौहान ने प्राप्त किया।
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