हल्द्वानी: चीर बंधन और रंग डालने के साथ पूरे कुमाऊं में खड़ी होली की हुई शुरुआत
हल्द्वानी, अमृत विचार। चीर बंधन और रंग डालने के साथ गुरुवार को उत्तराखंड समेत पूरे कुमाऊं में खड़ी होली की भी शुरुआत हो गई है। घरों में लोगो ने अपने देवताओं को रंग चढ़ाया और पितरों को याद किया। साथ ही अबीर, गुलाल लगा कर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।
श्री रामलीला कमेटी की ओर से गुरुवार को सुबह नौ बजे सिंधी चौक स्थित होलिका मैदान में चीर बंधन हुआ। पं. गोपाल दत्त शास्री ने शुभ महूर्त में विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजन किया। सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह ने पूजन के बाद चीर बंधन की स्थापना की।
वहीं, होलिका मैदान में स्थित भक्त प्रहलाद की प्रतिमा पर कमेटी सदस्य मनोज गुप्ता ने स्नान व पूजन किया। इसके बाद कमेटी ने पटेल चौक में चीर बंधन किया। तनुज गुप्ता ने बताया कि सात मार्च को सायं पांच बजे रूद्रपुर के कलाकारों की ओर से भजन संध्या ओर होली गायन होगा। सायं 7 बजे होलिका दहन होगा। आठ मार्च को छलड़ी होगी। इस दौरान एनबी गुणवंत, बसंत अग्रवाल, विवेक कश्यप, तनुज गुप्ता, अतुल अग्रवाल, संजय गुप्ता, राजेंद्र अग्रवाल मुन्ना, विजय गुप्ता, बिंदेश जायसवाल, निशुल अग्रवाल, प्रदीप जनोटी, भवानी शंकर नीरज, अनिल गुप्ता, योगेश शर्मा आदि मौजूद थे।
कुमाऊं में चीर या निशान बंधन की भी अलग विशिष्ट परंपरायें हैं। इनका कुमाऊंनी होली में विशेष महत्व माना जाता है। होलिकाष्टमी के दिन ही कुमाऊं में कुछ मन्दिरों में चीर बंधन का प्रचलन है लेकिन अधिकांश गांवों, शहरों में सार्वजनिक स्थानों में एकादशी को मुहूर्त देखकर चीर बंधन किया जाता है। इसके लिए गांव के प्रत्येक घर से एक नए कपड़े के रंग बिरंगे टुकड़े चीर के रूप में लंबे लट्ठे पर बांधे जाते हैं।
इस अवसर पर कैलै बांधी चीर हो रघुनन्दन राजा, सिद्धि को दाता गणपति बांधी चीर हो’ जैसी होलियां गाई जाती हैं। इस होली में गणपति के साथ सभी देवताओं के नाम लिऐ जाते हैं। कुमाऊं में ‘चीर हरण’ का भी प्रचलन है। गांव में चीर को दूसरे गांव वालों की पहुंच से बचाने के लिए दिन-रात पहरा दिया जाता है।
चीर चोरी चले जाने पर अगली होली से गांव की चीर बांधने की परंपरा समाप्त हो जाती है. कुछ गांवों में चीर की जगह लाल रंग के झण्डे निशान का भी प्रचलन है, जो यहां की शादियों में प्रयोग होने वाले लाल सफेद निशानों की तरह कुमाऊं में प्राचीन समय में रही राजशाही की निशानी माना जाता है।
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