बरेली: इन्फ्लूएंजा वायरस से निपटने के लिए तैयारियों में जुटा स्वास्थ्य विभाग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कुछ माह से देश के अनेक राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में इन्फ्लूएंजा के समान लक्षण वाले रोगियों तथा सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) के रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। जिसके दृष्टिगत एक उच्चस्तरीय मीटिंग के उपरान्त केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को दिशा निर्देश निर्गत किये गए हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

इस बारे में सीएमओ डॉ बलवीर ने बताया इन्फ्लूएंजा रोग वार्षिक आवृत्ति वाली एक मौसमी बीमारी है। मौसमी परिवर्तन के साथ साथ व्यक्तिगत स्वच्छता पर कम ध्यान दिये जाने, अन्य लोगों की निकट संपर्क में रहते हुए बिना उचित सुरक्षा के खांसने अथवा छीकने तथा बंद स्थानों पर होने वाली बैठकों, समारोहों इत्यादि के कारण इन्फ्लूएंजा ए ग्रुप के श्वसन तंत्र का संक्रमण करने वाले अनेक वायरस यथा HINI H3N2, एडिनोवायरस इत्यादि का प्रसार वर्तमान मौसम में सामान्यतः देखने को मिलता है। 

वर्तमान में अनेक प्रदेशों से इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस (III) तथा सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (SARI) के केसेज की बढ़ती हुई संख्या की सूचना प्राप्त हुई है। इसी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर इंटीग्रेटेड सेन्टिनल बेस्ड सर्विलॉन्स के माध्यम से माह दिसंबर 2022 के उत्तरार्ध से इन्फ्लूएंजा की रोगियों की संख्या में भी वृद्धि सूचित हुई है। जिसमें अनेक प्रयोगशालाओं में की जा रही जांचों में इन्फ्लूएंजा H3N2 स्ट्रेन की प्रमुखता पाई जा रही है। भारत सरकार के द्वारा यह भी सूचित किया गया है कि जनवरी 2023 से अभी तक देश में स्थापित विभिन्न वायरल रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क में की गई जांच के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 25.4% सैंपल एडिनोवायरस के लिए धनात्मक पाए गए हैं। 

इन्फ्लूएंजा वायरस समूह के अधिकांश वायरस हल्की फुल्की तथा स्वतः नियंत्रित हो जाने वाली श्वसन तंत्र की बीमारी करते हैं जिसमें बुखार तथा खांसी जैसे लक्षण पाए जाते हैं, परंतु कुछ रोगियों में – विशेषकर वृद्ध व्यक्तियों, अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों अथवा अन्य स्थितियों (यथा क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज - COPD. डायबिटीज़, कार्डियोवैस्कुलर रोग, गुर्दे अथवा जिगर की क्रोनिक बीमारी इत्यादि) से पीड़ित व्यक्तियों तथा गर्भवती महिलाओं में रोग के लक्षण गंभीर हो सकते हैं जिसके कारण रोगी को चिकित्सालय में भर्ती भी करना पड़ सकता है।

इस बात पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है कि कम उम्र के बच्चे, वृद्ध व्यक्ति H1N1, H3N2, तथा एडिनोवायरस इत्यादि से तो ग्रसित नहीं है। जिसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने को तैयार है। इसको लेकर टैक्नीशियन को ट्रेनिग दी जाएगी। साथ ही डॉक्टरों को भी इसके बारे में बता दिया गया है। उनका महकमा आदेश आने के बाद से तैयारियां करने में जुट गया है।

भारत के कई राज्यों में सीजनल एनफ्लूएंजा / एच3एन2 के  के रोगी पाये गये हैं। उक्त को दृष्टिगत रखते हुए सीजनल एनफ्लूएंजा / एच३एन2 के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम हेतु निम्न सावधानिया एवं प्रोटोकाल का अनुपालन कराया जाना नितान्त आवश्यक है। 

सीजनल एनफ्लूएंजा / एच3एन2 के लक्षण 
खासी, गले में खरास नाक बहना या नाक बंद रहना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, बुखार, ठंड लगना, थकान, सांस फूलना, दस्त एवं उल्टी । 

रोग से बचाव और उपाय
सार्वजनिक स्थलों, चिकित्सालयों, कार्यालयों, बाजारो एवं अन्य भीडभाड वाले स्थानों पर मास्क एवं सेनेटाइजर का प्रयोग करें।
खांसते एवं छीकते वक्त नाक एवं मुंह ढक कर रखें।
नाक चेहरा एवं आंख को बार-बार छूने से बचें।
पानी एवं तरल पदार्थ का अत्यधिक प्रयोग करें। 
हाथ मिलाने एवं गले मिलने से बचें।
सार्वजनिक स्थलों पर थूके नहीं।
सोशल डिस्टेसिंग का पालन सुनिश्चित करें।
वृद्ध एवं बच्चों को उक्त भीड भाड वाले जगहों पर ले जाने से बचें। 
सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों, बाजारो एवं अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर साफ-सफाई सुदृढ रखी जाए तथा
जनमानस को एनफ्लूएंजा से बचाव हेतु प्रचार-प्रसार किया जाए। 
एनफ्लुएंजा के लक्षण आने पर नजदीकी चिकित्सालय में सम्पर्क करें तथा चिकित्सीय परामर्श पर ही दवा का प्रयोग करें।

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