हल्द्वानीः करोड़ों के बजट व पर्याप्त संसाधन के बावजूद कई वर्षों से स्वच्छता रैंकिग में पिछड़ा निगम

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Edited By Amrit Vichar
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125 करोड़ रुपये का बजट, 60 वॉर्ड, 1000 सफाई कर्मी और 100 कूड़ा वाहनों के वाबजूद कभी नंबर 1 नहीं बन पाया नगर निगम 

स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान के लिए जल्द ही केंद्रीय टीम पहुंच सकती शहर

गौरव तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। नंबर 1 पर आने की ख्वाहिश और इसके लिए नगर निगम के पास पर्याप्त संसाधन भी है। 60 वार्डों में 1 हजार सफाई कर्मी, 100 छोटे बड़े कूड़ा वाहन और हर वित्तीय वर्ष में करोड़ों का बजट, नंबर 1 की बात तो दूर है, नगर निगम हल्द्वानी देश के 10 नगर निगम में भी आज तक शुमार नहीं हो सका। निगम की लालसा राज्य में भी पूरी नहीं हुई। अब केंद्र से स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम कभी भी शहर पहुंच सकती है। शहर में कई कूड़े के ढेर लगे है, रेंकिंग में सुधार को निगम को भगीरथ प्रयास की जरूरत है। 

स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में हल्द्वानी नगर निगम ने मुंह की खाई थी। लगातार दो वर्षों से हल्द्वानी सफाई में पिछड़ा रहा है। पिछले वर्ष 281वें स्थान पर रहा हल्द्वानी एक पायदान नीचे होकर 282वें स्थान पर आ गया है। 2020 में हल्द्वानी को 229वीं रैंक मिली थी। एक लाख से अधिक आबादी वाले 382 शहरों के सर्वेक्षण के आधार पर हल्द्वानी ने यह स्थान पाया है। उत्तराखंड के आठ नगर निकायों में हल्द्वानी का छठा स्थान है।

स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान के लिए जल्द ही शहर में केंद्रीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंच सकती है। लेकिन आलम यह है कि अभी भी ट्रंचिंग ग्राउंड कूड़े के ढेर में लगी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। वहीं दूसरी ओर शहर के विभिन्न जगहों पर लोग कूड़े के ढेर में आग लगाते दिख जाते है, लेकिन उसके बाद भी नगर निगम इन्हें चिन्हिंत नहीं कर पा रहा है। जबकि इसके लिए नगर निगम की ओर से लाखों रुपये की लागत विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए लेकिन उसके बाद भी लोग निश्चित होकर कचरा फैलाने में मगन है।

बीते दिनों ही मंडलायुक्त ने एक व्यक्ति को रंगेहाथ खुले में कूड़े जलाते हुए पकड़ा था। जिस पर उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की थी। दूसरी ओर नगर निगम के पास पर्याप्त संसधान मौजूद है, लेकिन उसके बाद भी हल्द्वानी की रैंकिग में सुधार नहीं हो पा रहा है।

पिछले वर्ष यहां पिछड़ गया था हल्द्वानी

स्वच्छता सर्वे के परिणाम में हल्द्वानी की सबसे खराब स्थिति घर-घर से कूड़ा उठान व शहर के सुंदरीकरण में दर्शाई गई है। सड़कों, सार्वजनिक शौचालय, आवासीय परिसर, बाजार की सफाई को सराहा गया। सर्टिफिकेशन यानी दस्तावेजीकरण में हल्द्वानी पिछड़ा। ओडीएफ प्लस के 400 अंक ही हल्द्वानी के हिस्से आए।

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