हल्द्वानी: महिला अस्पताल में नहीं मिला इलाज, एसटीएच में जन्मा मृत बच्चा
आठ घंटे महिला अस्पताल में भर्ती रही गर्भवती, हालत गंभीर होने पर चिकित्सक ने एसटीएच रेफर किया
पति ने लगाया आरोप, कहा - समय पर इलाज मिलता तो बच जाती बच्चे की जान
हल्द्वानी, अमृत विचार। महिला अस्पताल में संवेदनहीनता का मामला बड़ा सामने आया है। प्रसव के लिए आई एक गर्भवती को आठ घंटे अस्पताल में भर्ती रहने के बाद इलाज नहीं मिला। हालत गंभीर होने पर उसे अन्यत्र एसटीएच रेफर कर दिया गया। जहां प्रसव के दौरान मृत बच्चे का जन्म हुआ।
वार्ड 14 टनकपुर रोड निवासी शहंशाह कबाड़ की दुकान में मजदूरी करता है। बताया कि रविवार की सुबह लगभग 11 बजे वह पत्नी मैविश (31) को प्रसव पीड़ा होने पर ऑटो से महिला अस्पताल लेकर गया। जहां चिकित्सकों ने उसे भर्ती कर लिया गया।
करीब एक घंटे बाद जब उसने पत्नी का हाल जानने के लिए चिकित्सक से पूछा तो कुछ नहीं बताया। उल्टा उस पर भड़की उठीं। शाम लगभग 6 बजे महिला चिकित्सक ने पत्नी की जांच की और हालत खराब होने की बात कही। साथ ही उसे सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने को कहा।
जिस पर वह तुरंत पति को लेकर एसटीएच लेकर पहुंचा। जहां चिकित्सकों ने जांच कर बच्चे की धड़कन न मिलने की बात कही। रात ढाई बजे डिलीवरी के दौरान पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया। शहंशाह ने कहा कि अगर समय रहते महिला अस्पताल में चिकित्सक पत्नी की जांच कर लेते तो बच्चा बच जाता। बताया कि यह उसका चौथा बच्चा था। उसकी एक बेटी और दो बेटे हैं। पत्नी का एसटीएच में इलाज चल रहा है।
पहले की घटनाओं से नहीं लिया कोई सबक
केस 1
गफूर बस्ती वार्ड 22 के इमरान कुरैशी उर्फ राजा ने बताया कि 30 अगस्त को पत्नी शब्बो को प्रसव पीड़ा होने पर वह महिला अस्पताल ले गया। वहां इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक ने बच्चेदानी का मुंह न खुलने की बात कहकर लौटा दिया। जैसे ही वह छतरी चौराहे के पास पहुंचे अचानक ऑटो में बच्ची का जन्म हो गया। जिस कारण नवजात के सिर पर चोट लग गई और आंख के पास सूजन आ गई।
केस 2
उजाला नगर के शाहवेज खान ने बताया कि 11 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने पर वह पत्नी फरहा को महिला अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सक ने रिपोर्ट देखी, कहा कि अभी आठवां महीना चल रहा है। इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया। साथ ही दोबारा दर्द होने पर एसटीएच ले जाने को कहा। सुबह चार बजे अचानक दर्द हुआ तो पत्नी को एसटीएच ले गए। जहां डिलीवरी के बाद कुछ घंटों बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया।
केस 3
उत्कर्ष विहार निवासी विरेंद्र सिंह ने बताया कि 25 अगस्त को पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वह रात 12 बजे महिला अस्पताल ले गये। जहां चिकित्सकों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया और एसटीएच ले जाने को कहा। अस्पताल प्रशासन से निजी अस्पताल तक छुड़वाने की गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं मिली। ऑटो से निजी अस्पताल जाते समय रास्ते में गर्भवती ने बच्चे को जन्म दे दिया।
राजकीय महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. उषा जंगपांगी का कहना है कि मरीज कमजोर थी। चार साल में उसका चौथा बच्चा था। जांच में बच्चे की धड़कन घट-बढ़ रही थी। हालत गंभीर होने पर सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया। रात में तैनात चिकित्सक से जानकारी ली जा रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज की गायनी प्रोफेसर डॉ. गोदावरी जोशी का कहना है कि महिला को देर रात अस्पताल लाया गया था। बच्चे की धड़कन नहीं थी। इसकी जानकारी परिजनों को दी गई। सुबह के समय डिलीवरी की गई। फिलहाल गर्भवती की हालत ठीक है।
