बरेली: जेल अधीक्षक का दुस्साहस... चौतरफा आरोप, कई स्तर पर जांच फिर भी अशरफ की सुख-सुविधाएं कम नहीं
पहली अप्रैल को प्रशासनिक टीम के छापे में खुली पोल, आपत्तिजनक चीजों की बरामदगी के साथ जेल में मिले माफियाराज जैसे हालात
बरेली, अमृत विचार। जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला अपने दुस्साहस की वजह से निलंबित हुए। प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या के बाद चौतरफा जांच और आरोपों में घिरे होने के बावजूद जेल में कायम माफियाराज में कोई तब्दीली नहीं आई।
पहली अप्रैल की रात को जब प्रशासन की टीम ने जेल में छापा मारा, तब भी माफिया अशरफ समेत कई बंदियों को खास सुख-सुविधाएं मुहैया कराए जाने की पुष्टि हुई। यही नहीं कई आपत्तिजनक चीजों की भी बरामदगी हुई। इसके बाद प्रशासनिक टीम की रिपोर्ट शासन में पहुंचते ही राजीव शुक्ला को निलंबित कर दिया गया।
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जेलों में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने के साथ किस कदर माफियाराज स्थापित हो चुका है, वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला का निलंबन इसकी मिसाल बन गया है। उमेश पाल की हत्या के बाद इसकी पुष्टि हो चुकी थी कि इसकी साजिश बरेली जिला जेल में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ ने रची थी। कई जेल अधिकारियों को निलंबित करने के साथ दो बंदीरक्षक जेल भेजे जा चुके थे, खुद वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरोपों से घिरे हुए थे लेकिन इसके बावजूद जेल उन्होंने न जेल में अशरफ की सुख-सुविधाओं में कटौती की न बंदियों से मुलाकातों के लिए जेल के नियम-कायदे लागू किए।
डीजी जेल एसएस साबत के मुताबिक पहली अप्रैल की रात को प्रशासन की टीम ने बरेली जिला जेल में छापा मारा तो अशरफ समेत कई बंदियों को खास सुख-सुविधाएं दिए जाने की पुष्टि हुई। कई आपत्तिजनक चीजों की भी बरामदगी हुई, इसके साथ छानबीन में यह भी पता चला कि अशरफ समेत कुछ खास बंदियों की पहले की तरह तय स्थान के बजाय अलग जगहों पर मुलाकात कराई जा रही हैं। प्रशासन की रिपोर्ट पर ही राजीव शुक्ला को निलंबित कर दिया गया।
जेल अधीक्षक के दम पर ही चलता था अशरफ का सिक्का
माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ का बरेली जिला जेल में वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला के ही दम पर सिक्का चलता था। जेल अधिकारी और कर्मचारी उसे ठोकते थे। उमेश पाल की हत्या करने वाले शूटरों से जेल में अशरफ की मुलाकात कराने में भी उनका हाथ माना जा रहा है।
अशरफ से मुलाकात कराने के लिए इनका पहचान पत्र तक नहीं लिया गया और न किसी का रजिस्टर में ब्योरा दर्ज किया गया। तत्कालीन डीजी जेल आनंद कुमार पहले ही एक जेलर, एक डिप्टी जेलर समेत सात जेल कर्मियों को निलंबित कर चुके हैं। इन्हीं अधिकारियों के दम पर अशरफ जेल में जो चाहता था, वह करता था। पूरे प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी अब जेल अफसरों के नाम भी एफआईआर में शामिल कर सकती है।
इन अफसरों और कर्मचारियों पर हो चुकी है कार्रवाई
अशरफ को जेल में विशेष सुख-सुविधा देने के साथ बिना पर्ची और तय स्थान से अलग जगह मुलाकात कराने के मामले में पहले ही सात जेल कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें जेलर राजीव कुमार मिश्र, डिप्टी जेलर दुर्गेश प्रताप सिंह , हेड जेल वार्डर ब्रिजवीर सिंह, जेल वार्डर मनोज गौड़, दानिश मेंहदी, दलपत सिंह, समेत शिवहरि अवस्थी शामिल हैं। शिवहरी और मनोज गौड़ को जेल भी भेजा जा चुका है।
रोज मिलने आते थे 35 से 40 लोग, नाम दर्ज होता था सिर्फ एक
डीआईजी जेल आरएन पांडेय ने तत्कालीन जेल डीजी आनंद कुमार को अपनी जांच रिपोर्ट भेजी थी जिसमें कहा गया था कि अशरफ से 11 फरवरी से पहले और बाद में कई दिनों तक 35 ले 40 लोग रोज मिलने आते रहे।
मुलाकात के रजिस्टर में सिर्फ एक व्यक्ति का नाम दर्ज होता था। इनमें से कितने उसके परिजन और गैंग के सदस्य थे, किसी भी अधिकारी को पता नहीं होता था। इसी तरह शूटरों ने भी अशरफ से मुलाकात की थी। जेल के दस्तावेजों में भी गड़बड़ी मिली थी। डीआईजी ने अशरफ की निगरानी बढ़ाने और जेल में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी कई सुझाव दिए थे।
एक अप्रैल को उच्चाधिकारियों ने बरेली जिला जेल में औचक निरीक्षण किया तो कई बंदियों को खास सुख-सुविधा मुहैया कराए जाने के साथ कई और गड़बड़ियां मिलीं। तय स्थान से अलग जगह मुलाकात कराए जाने की भी पुष्टि हुई। माफिया अशरफ को जेल में वीवीआईपी सुविधाएं मुहैया कराने की पहले ही पुष्टि हो चुकी थी। इसी कारण वरिष्ठ जेल अधीक्षक को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध किया गया है---एसएस साबत, डीजी जेल।
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