बरेली: IVRI पहुंचे मंत्री रूपाला, बोले- आकर पता लगा...वैक्सीन का परीक्षण भी होता है यहां

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केंद्रीय मत्स्य, डेयरी एवं पशुपालन मंत्री परशोत्तम रुपाला ने विभागीय कामों की समीक्षा कर शोध कार्यों का लिया जायजा

आईवीआरआई के भ्रमण के दौरान केंद्रीय कैबिनेट मंत्री मत्स्य, डेयरी व पशुपालन परशोत्तम रूपाला तकनीक की जानकारी देते डा. त्रिवेणी दत्त(फोटो)

बरेली, अमृत विचार। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने शनिवार शाम भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के कार्यों की समीक्षा के साथ परिसर का दौरा यहां चल रहे शोध कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि यह उन्हें आईवीआरआई ही आकर पता चला कि देश में उच्च गुणवत्ता के मापदंडों से निर्मित वैक्सीन का भी परीक्षण यहां होता है।

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ब्राजील के एक परिवार ने भारतीय गिर प्रजाति की गाय के संवर्धन में जो उपलब्धि हासिल की है, वह उसे भारत के साथ बांटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पशुपालन क्षेत्र को एक प्राइम सेक्टर के रूप में विकसित करने का विचार किया है।

निश्चित ही इससे देश समाज और पशुओं का भला होगा। प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 26 मार्च को 520 मोबाइल वेटेनरी यूनिट देकर बड़ा काम किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के अनुरोध पर उन्होंने आईवीआरआई को भी एक मोबाइल वेटनरी वाहन देने की घोषणा की। केंद्रीय मंत्री के दौरे और बैठक के दौरान मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा, संस्थान के संयुक्त निदेशक, कैडराड डॉ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह भी मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री ने देखे आईवीआरआई के हाईटेक फार्म
केंद्रीय मंत्री ने आईवीआरआई में विभिन्न विभागों और अनुभागों में शोध कार्य की समीक्षा की। संस्थान में विकसित विभिन्न तकनीकों की जानकारी ली। उन्हें शुरू से अब तक विकसित की गई तकनीक की जानकारी दी गई। इनमें लंपी प्रो, ब्रूसेल्ला, पीपीआर, सीएसएफ, भेड़-बकरी में पॉक्स, गमबोरो,

डक प्लेग, आईबीआर वैक्सीन, भूसा, मक्का, चोकर, खल से बना संघनित संपूर्ण पशु आहार, पशु चॉकलेट, न्यूकैसल डिजीस वायरस एंटीबॉडी एलाइजा मशीन, इन्फेक्शनल ब्रूसल डिसीज वायरस एंटीबॉयोटिक किट, प्लांट बेस्ड मीट क्वालिटी इडीकेंटर किट जैसी तकनीकें शामिल थीं। मंत्री ने बताया कि जल्द ही आईवीआरआई से सुझाव लेकर देश भर में गोशालाओं को इस आधार पर संचालित किया जाएगा।

जूनागढ़ में रेफरल सेंटर बनाएगा आईवीआरआई
आईवीआरआई इज्जतनगर के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान के 133 सालों में हुए शोध की जानकारी दी। कहा, जूनागढ़ में एक रेफरल सेंटर बनाने की जिम्मेदारी आईवीआरआई को दी गई है। उन्होंने बेंगलुरु में नेशनल हर्बल गार्डन और ऑर्गेनिक लाइवस्टोक डेवलपमेंट पर भी बात की। बताया कि संस्थान के कई हेरिटेज भवनों के सुधार कार्य चल रहे हैं। अगले सत्र से वेटेनरी साइंस के साथ फूड साइंस, बायोकेमिस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी आदि विषयों पर भी अंडर ग्रेजुएट कोर्स की शुरूआत होगी।

88 मिलियन डोज से संस्थान को मिला 113 मिलियन का राजस्व
बैठक में निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि जैविक उत्पाद विभाग में रिंडरपेस्ट, एंथ्रेक्स, एचएस आदि जैसी विनाशकारी बीमारियों के लिए वैक्सीन और डायग्नोस्टिक्स (टीके और नैदानिक) का उत्पादन प्रमुख उद्देश्य है। विभाग में उत्पादित टीके और नैदानिक ने अफ्रीकन हॉर्स सिकनेस और रिंडरपेस्ट जैसी दो खतरनाक बीमारियों के उन्मूलन में बहुत योगदान दिया।

25 वर्षों में लगभग 88 मिलियन डोज टीके, 19 मिलियन डोज नैदानिकी के उत्पादन से संस्थान ने लगभग 113 मिलियन रुपये का राजस्व अर्जित किया। वृंदावनी गाय की एक नई संकर प्रजाति के पंजीकरण के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थान एनबीएजीआर में आवेदन किया है।

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