लखनऊ: बिना लाइसेंस और प्रशिक्षण के उड़ाए जा रहे ड्रोन
डीजीसीए से लेना होता यूआईएन व चलाने की अनुमति, लेकिन पालन नहीं
प्रशांत सक्सेना/ लखनऊ, अमृत विचार। ड्रोन के इस्तेमाल ने अधिकांश काम आसान कर दिए हैं। चाहें कृषि क्षेत्र हो या किसी तरह की वीडियो या फोटोग्राफी। लेकिन, विशेषज्ञों की मानें तो कहीं भी किसी भी कार्य के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बिना डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन, दिल्ली (डीजीसीए) की अनुमति के नहीं कर सकते हैं। जो ऑनलाइन मिलती हैं। वहीं, ड्रोन खरीदने पर डीजीसीए में पंजीयन कराकर विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) लेना होता है। बगैर इसके ड्रोन उड़ा नहीं सकते हैं। इसके अलावा डीजीसीए की अधिकृत संस्थाओं से ड्रोन चलाने के लिए प्रशिक्षण के साथ रिमोट पायलट सर्टिफिकेट यानी लाइसेंस भी लेना अनिवार्य है। लेकिन, इन नियमों का ज्यादातर पालन नहीं होता है। वहीं, ड्रोन का परीक्षण करने तक के लिए डीजीसीए ने कुछ राज्यों के जिलाें में चिह्नित क्षेत्रों को अनुमति दी है। जिसमें उत्तर प्रदेश का लखनऊ व सुल्तानपुर जिला ही अधिकृत है।
बेंगलुरु, गुरुग्राम व रायबरेली में प्रशिक्षण केंद्र
ड्रोन चलाने के लिए प्रशिक्षण लेना होता है, जो डीजीसीए की अधिकृत संस्थाएं देती है। यह रिमोट पायलट सर्किफिकेट देती हैं। यह केंद्र भारत के बेंगलुरु, गुरुग्राम समेत कुछ राज्यों के जिलों में संचालित है। जिसमें उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक केंद्र है।
इंटेलिजेंस एजेंसियों को अनुमति जरूरी नहीं
ड्रोन चलाने के लिए इंटेलिजेंस एजेंसियों को यूआईएन लेने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, कृषि कार्य में कीटनाशक छिड़काव के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जो विभाग खुद अनुदान पर पंजीयन कराने के साथ प्रशिक्षण देकर कर रहा है। बाकी निजी आयोजन व अन्य कार्यों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
ड्रोन उड़ाने के मानक
- ड्रोन, पायलट और मालिकों का एक बार पंजीयन
- यूआईएन व यूएओपी लाइसेंस लेना
- रिमोट पायलट ट्रेनिंग व सर्टिफिकेट
परीक्षण की इन राज्यों के 23 जगहों में अनुमति
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, कनार्टक, केरला, तमिलनाड़ु, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र।
ड्रोन का पंजीयन, लाइसेंस और प्रशिक्षण डीजीसीए में अनिवार्य है और चलाने के लिए भी संबंधित क्षेत्र की अनुमति लेनी होती है। लेकिन, इन नियमों का पालन ज्यादातर नहीं होता है। परीक्षण के लिए भी कुछ जिलों में क्षेत्र निर्धारित कर अनुमति दी गई है।- कैप्टन अकरम बेग, निदेशक, एयर बॉन एवीएशन एकेडमी प्रालि, लखनऊ
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