हल्द्वानी: अस्थमा पीड़ित हैं तो हो जाएं सावधान, एसी कर सकता है बीमार

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Edited By Amrit Vichar
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भूपेश कन्नौजिया, हल्द्वानी । गर्मी का आगाज हो चुका है और कई घरों-दफ्तरों में एसी भी ऑन हो चुके हैं, लेकिन इस बीच शहर में अस्थमा, जुकाम,सर में भारीपन, सर दर्द और हाथ पैरों में जकड़न बताने वाले  मरीजों की भी संख्या बढ़ी है। वहीं सांस लेने में तकलीफ बताने वाले मरीजों की संख्या हलांकि ज्यादा तो नहीं है पर हां ये वे लोग हैं जो एसी में रहकर काम करते हैं या सोते हैं। 

इस पूरे मामले को लेकर जब सुशीला तिवारी अस्पताल के डा.अरूण कुमार जोशी और आईवीआरआई मुक्तेश्वर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.मनु मालवीय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गर्मी की शुरुआत के साथ ही यदि आप एसी चलाने जा रहे हैं तो अलर्ट हो जाइए। ऐसा इसलिए क्योंकि एसी और उसके पार्ट बिना सफाई के फंगस और  डस्ट माइट यानी धूल के कणों का घर बन जाते हैं। जैसे ही एसी चलाया जाता है उसके साथ ये पूरे वातावरण में फैल जाते हैं और लोगों को बीमार कर देते हैं। गंभीर बात यह है कि यदि कोई अस्थमा पीड़ित है तो इन फंगस और डस्ट माइट से अस्थमा का अटैक तक आ सकता है। मालूम हो कि पिछले एक हफ्ते से ऐसे मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।

डा. मालवीय ने बताया कि  किसी भी एसी में यदि एक ग्राम डस्ट निकलती है तो उसमें कम से कम 10 मिलियन फंगस और डस्ट माइट निकलते हैं, इतने अधिक फंगस स्वस्थ्य व्यक्ति को भी बीमार कर सकते हैं यदि कोई व्यक्ति इसके संपर्क में आता है तो उसे तुरंत खांसी, गंभीर रूप से जुकाम और सांस लेने में तकलीफ हो सकती हैं। वह चिड़चिड़ा हो जाएगा, यहां तक कि यदि वह अस्थमा से ग्रसित है तो उसे अटैक तक आ सकता है।

हो सकता है फेफड़ों में संक्रमण
हल्द्वानी। चिकत्सकों का कहना है कि यदि फंगस व्यक्ति के अंदर चला जाए तो फेफडों में संक्रमण होना तय है और यह फंगल निमोनिया का रूप ले सकता है, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों सहित कैंसर, डायबिटीज, ट्रांसप्लांट वाले लोगों को इससे पूरी तरह से बचना चाहिए ताकि गंभीर खात पैदा नहीं हो।

एसी चालू करने से पहले सफाई जरूरी
हल्द्वानी। किसी भी एसी को चालू करने से पहले पूरी तरह से साफ कराएं, यहां तक की अपनी कार के एसी की भी सर्विस करानी चाहिए। एसी की जाली को अच्छे से साफ करें। यदि किसी को एलर्जी है तो एसी की जाली को बदलवाएं। यदि अस्थमा के मरीज हैं तो वह एंटी एलर्जिक दवा लें अन्यथा एलर्जी अटैक आ सकता है, मगर चिकित्सक के परामर्श लेना जरूरी है।

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