बरेली: अगले साल शुरू होगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, अगस्त 2024 तक पूरा होना था काम
244 करोड़ की लागत से हरुनगला में बन रहे एसटीपी में 13 नालों का पानी एसबीआर तकनीक से शुद्ध होगा, खेती के काम आएगा, अब तक 61 फीसदी कार्य हुआ पूरा
बरेली, अमृत विचार : नमामि गंगे परियोजना के तहत 234 करोड़ की लागत से हरुनगला में बन रहा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ( एसटीपी) अगले साल जनवरी में शुरू हो जाएगा। 42 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण 61 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अगस्त 2024 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि परियोजना से जुड़े अफसर दिसंबर 2023 तक काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं।
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परियोजना निदेशक सुशील चौहान ने बताया कि एसटीपी प्लांट को सिक्वेंसियल बैच रियेक्टर (एसबीआर) तकनीक से तैयार किया जा रहा है। इससे बैरियर टू चौकी से सेटेलाइट चौराहा तक नकटिया नदी में गिरने वाले 13 नालों के पानी को शोधित कर खेती, पशुओं एवं कपड़े धोने के प्रयोग में लिया जाएगा। हालांकि यह पीने के पानी के लिहाज से प्रयोग नहीं होगा।
नालों के पानी को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए करीब 16 किलोमीटर लंबी इंटरसेप्टिक पाइप लाइन बैरियर टू चौकी से सैटेलाइट तक बिछाई जा रही है। महानगर तक यह लाइन पहुंच चुकी है।
धौरेरा माफी बैरियर नाला, धौरेरा माफी गांव नाला, सौ फुटा रोड नाला, जगतपुर पुलिस चौकी नाला, सुपर सिटी नाला, सनराइज कालोनी नाला, आशीष रायल पार्क नाला, रुहेलखंड विश्वविद्यालय नाला, महानगर नाला, हरुनगला नाला, ग्रीन पार्क नाला, सेटेलाइट बस नाला के पानी को एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा।
कंप्यूटराइज्ड होगा प्लांट, स्क्रीन पर दिखेगी आक्सीजन की मात्रा: परियोजना निदेशक बताते हैं कि यह प्लांट पूरी तरह ऑटोमोड में संचालित होगा। यहां लगे स्क्रीन पर देखा जा सकेगा कि ट्रीट किए गए पानी में ऑक्सीजन की मात्रा क्या है। पूरी तरह कंप्यूटराज्ड होने के कारण दिल्ली में बैठे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर भी इस प्रोजेक्ट के जल की गुणवत्ता की निगरानी कर सकेंगे।
उन्होंने यह बताया कि प्लांट पूरी तरह से शुरू होने के बाद अगले 15 साल तक देखरेख और संचालन का काम करेगी। इस दौरान जल की गुणवत्ता की कमी पाई गई तो कंपनी पर भारी जुर्माना ठोंकने का भी प्रावधान है।
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