पौड़ी गढ़वाल: जिले के 24 गावों में लगा बाघ के डर से Night Curfew
पौड़ी गढ़वाल, अमृत विचार। पौड़ी की दो तहसीलों रिखणीखाल और घुमकोट के 24 से ज्यादा गांवों में बाघ चुनौती बना है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने देर रात तक प्रभावित गांवों के जंगलों में वनकर्मियों के साथ गश्त की।
जिलाधिकारी चौहान ने तहसील रिखणीखाल के ग्राम डल्ला व तहसील घुमकोट के अंतर्गत ग्राम सिमली पहुंचकर बाघ के हमले से प्रभावित/पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्होंने सांत्वना दी। डीएफओ को बाघ को पकड़ने के लिए दोनों जगहों पर पिंजरे लगाने के साथ ही फॉरेस्ट कर्मियों की गश्त बढ़ाने के भी निर्देश दिए।
वहीं, दोनों घटना स्थलों पर वन विभाग, पुलिस कर्मचारी सहित अन्य विभागों के अधिकारी गांव में डटे हैं। बाघ को पकड़ने के लिए डल्ला गांव में 2 ट्रेंक्यूलाइजर टीमो की तैनाती की जा चुकी है जबकि सिमली के ग्रामीणों की सुरक्षा के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने डीएफओ लैंसडौन की अगुवाई में पृथक से एक ट्रेंक्यूलाइजर टीम तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि क्षेत्रवासियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में है इसलिए बाघों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने सिमली में बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने के निर्देश दिए हैं।
बाघ वयस्क और काफी तंदुरुस्त भी
सिमली के ग्रामीणों ने कहा कि बाघ वयस्क है और काफी तंदुरुस्त भी है जबकि इसके उलट डल्ला गांव में लगाए गए ट्रैक कैमरों में बाघ के दो शावक दिखाई दे रहे हैं जो कि शिकार करने में अनुभवहीन दिखाई दे रहे हैं।
जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव के आसपास कितने बाघ हैं, इसकी ठोस मॉनिटरिंग करते हुए सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक बाघ को पकड़ा नहीं जाता है, तब तक गांवों में फॉरेस्ट विभाग के माध्यम से निरंतर गश्त कराई जाए और किसी भी प्रकार का इनपुट मिलने पर इसकी जानकारी तत्काल देना सुनिश्चित करें।
