Rudrapur News: वर्ष 2018 में ही समाप्त हो चुका था सामिया लेक सिटी का रजिस्ट्रेशन, तय मानकों से विपरीत होने पर घोषित हुआ था डिफाल्टर

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मनोज आर्या, रुद्रपुर, अमृत विचार। रेरा द्वारा चर्चित रियल स्टेट कारोबारी सामिया लेक सिटी का वर्ष 2018 में ही रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया था और उसकी 44 एकड़ भूमि को कुर्क करते हुए खरीद-फरोख्त को बंद करने का फरमान भी जारी किया था। 

तय मानकों के विपरीत होने पर हो चुकी है कार्रवाई 

बावजूद इस ग्रुप के मालिक और निदेशक ने कुटरचित तरीके से कुर्क भूमि को धड़ल्ले से बेचा और अपने घर का सपना देखने वाले लोगों को ठगी का शिकार बनाया। बताया जा रहा है कि मानकों में खरा नहीं उतरने पर प्रशासन सामिया की कई आरसी काट चुका है।

धोखाधड़ी के मामले में लगातार हो रहे उजागर 

बताते चलें कि 14 अप्रैल से ठगी के आरोपों में घिरे सामिया ग्रुप के मालिक जमील-ए-खान और निदेशक सगीर अहमद खान के धोखाधड़ी के मामले लगातार उजागर होते जा रहे हैं। जहां एक ओर ठगी के शिकार लोगों की तहरीर पर एसआईटी जांच कर मुकदमे पंजीकृत कर रही है। 

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सामिया लेक सिटी के नाम से करवाया था रजिस्ट्रेशन

वहीं, वसूली के लिए राजस्व विभाग की टीम कुर्क संपत्ति की नीलामी करने की तैयारी कर रही है। मगर सामिया ग्रुप के मास्टरमाइंड इससे भी शातिर निकले। जिन्होंने उत्तराखंड के रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (रेरा) में 11 सितंबर 2017 को सामिया इंटरनेशनल बिल्डर दानपुर इलाके में सामिया लेक सिटी के नाम से रजिस्ट्रेशन करवाया था। जिसका नंबर यूकेआईपी 11170000103 था। जो ग्रुप के मालिक जमील ए खान, निदेशक सगीर अहमद खान, कैलाश कुमार व खतीब अहमद के नाम पर दर्ज थी।

लोगों की ओर से शिकायत मिलने पर हुई कार्रवाई

नियमों का पालन नहीं करने पर रेरा कोर्ट ने 31 दिसंबर 2018 को रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया, जबकि वर्ष 2023 तक कॉलोनी में 20 फीसदी निर्माण अभी पूरे नहीं हुए हैं। रजिस्ट्रेशन समाप्त होने के बाद भी आरोपियों द्वारा प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को ठगने का काम शुरू कर दिया और उसी भूमि को बेचा। लोगों ने कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं और ठगी की शिकायत रेरा कोर्ट में की तो जिला प्रशासन ने कॉलोनी के खिलाफ 16 आरसी व पैमाइस करवा कर 44 एकड़ भूमि को कुर्क कर भूमि को बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया।

वर्ष 2012 से 2018 तक खरीदारों को मिलता रहा धोखा

वर्ष 2017 में रेरा का रजिस्ट्रेशन होने से पहले ही सामिया ग्रुप द्वारा जिस भूमि का रजिस्ट्रेशन करवाया गया था। उसी भूमि का ज्यादातर हिस्सा वर्ष 2012 से 2018 तक बेचा जा चुका था। वर्ष 2017 में ग्रुप ने रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाया। उसके बाद से ही ठगी का शिकार लोगों ने रेरा कोर्ट में याचिका डालनी शुरू कर दी थी। 

पिछले पांच सालों में 50 करोड़ से अधिक की प्रतिबंधित जमीन को किया खुर्दबुर्द

2018 को रजिस्ट्रेशन खारिज होने तक तकरीबन सैकड़ों लोगों ने रेरा कोर्ट में रकम वापसी और ठगी होने की शिकायत कर दी थी। जिस पर रेरा कोर्ट ने कई बार सामिया प्रबंधन को लोगों का पैसा लौटाने का आदेश भी दिया। मगर ग्रुप ने आदेशों को दरकिनार कर दिया। बताया जा रहा है कि पिछले पांच सालों में ग्रुप ने 50 करोड़ से अधिक की प्रतिबंधित भूमि को खुर्दबुर्द कर दिया है।

छह पर हुआ मुकदमा, 27 से अधिक आ चुकी हैं तहरीर

सामिया ग्रुप की ठगी के शिकार लोगों की शिकायतें आने का सिलसिला 16वें दिन भी जारी है। 13 अप्रैल को पांच तहरीर पर केस दर्ज होने और 14 अप्रैल को सामिया ग्रुप के निदेशक सगीर अहमद की गिरफ्तारी के बाद से ही पीड़ितों के आने का दौर शुरू हो गया था। वर्तमान में पुलिस की एसआईटी ने जहां छह शिकायती पत्रों पर केस दर्ज कर लिया है। 

16 दिन के अंदर 27 से अधिक शिकायतें आईं

बताया जा रहा है कि पिछले 16 दिन के अंदर एसआईटी के सामने 27 से अधिक शिकायती पत्र आ चुके हैं। इन शिकायती पत्रों पर जांच के लिए एसआईटी को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। माना जा रहा है कि यदि सभी तहरीर पर जांच पूर्ण होने के बाद सामिया के मालिक एवं निदेशक पर मुकदमों की झड़ी लग सकती है।

क्या बोले जिम्मेदार

वहीं, उपजिलाधकारी प्रत्यूष सिंह ने बताया कि लोगों की लगातार मिल रही शिकायतों व रेरा नियमों का उल्लंघन करने पर कॉलोनी की 16 आरसी काटी गईं व 44 एकड़ भूमि को कुर्क कर ग्रुप को डिफाल्टर घोषित भी किया गया था। वर्तमान में कुर्क भूमि को नीलाम करने की तैयारी चल रही है।

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