कुत्तों का आतंक: बरेली में गुस्साए ग्रामीणों ने दी मतदान के बहिष्कार की चेतावनी

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Edited By Amrit Vichar
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कुत्तों के हमलों में चार बच्चों की मौत और दर्जनों के घायल होने के बाद भी नगर निगम की बेपरवाही पर भड़का गुस्सा

बरेली, अमृत विचार। सीबीगंज इलाके में आदमखोर कुत्तों के एक के बाद एक बच्चों की जान लेने के बावजूद नगर निगम की ओर से कुछ न किए जाने का मामला इस बार चुनावी मुद्दे की शक्ल अख्तियार करने लगा है। मंगलवार देर शाम कुत्तों के हमले में 10 वर्षीय अयान की मौत के बाद इलाके के लोगों ने जल्द सारे कुत्ते न पकडे़ जाने पर मतदान का बहिष्कार करने का एलान कर दिया।

सीबीगंज के कई गांवों में खूंखार कुत्तों का जबर्दस्त आतंक है। बंडिया गांव में नहर के पास दो महीने पहले कुत्तों के हमले में दो साल की बच्ची परी की मौत हो गई थी। इससे पहले 2022 में भी कुत्ते मोरपाल और रोहनी नाम के दो बच्चों की जान ले चुके हैं। इस बीच दर्जनों की संख्या में बच्चों को कुत्तों ने घायल भी किया। इनमें कई बच्चे अपंगता तक का शिकार हो चुके हैं। इसके बावजूद नगर निगम की ओर से लोगों को कुत्तों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कुछ नहीं किया। गांव के लोगों का आरोप है कि इस बीच वे नगर निगम के अफसरों के अलावा कई जनप्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

चुनावी माहौल में मंगलवार शाम कुत्तों के हमले में अयान की मौत के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने एलान किया है कि अगर जल्द ही गांवों में आदमखोर कुत्तों को न पकड़ा गया तो वे इस बार चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों की दहशत की वजह से बच्चों का घर से निकलना मुश्किल है। आए दिन बच्चों पर कुत्ते हमला कर उन्हें जख्मी कर रहे हैं। कई बार लिखित शिकायत के बाद एक बार नगर निगम से टीम आई भी तो सिर्फ दो कुत्तों को पकड़कर लौट गई।

अयान की जान लेने के बाद पांच साल के अर्श को भी नोचकर किया लहूलुहान, फिर घरों में कैद किए गए बच्चे
मंगलवार देर शाम कुत्तों के हमले में अयान की मौत के कुछ ही देर बाद करीब दर्जन भर कुत्तों ने नहर किनारे रहने वाले मुस्तकीम के पांच साल के बेटे अर्श पर भी हमला कर दिया। अर्श इस दौरान अपने घर के बाहर खेल रहा था। कुत्तों का झुंड उसे काफी दूर तक घसीटता हुआ ले गया। इस हमले में उसके हाथ-पैर में गहरे जख्म हो गए। आसपास के लोगों ने उसे कुत्तों के झुंड से बचाया। परिवार के लोगों ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है। एक ही दिन में दो घटनाओं के बाद गांव में एक बार फिर दहशत फैल गई और लोगों ने बच्चों को घर में कैद कर दिया।

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