पीलीभीत: सपा और दो निर्दलीय प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर, कमजोर पड़ रहीं भाजपा प्रत्याशी को कैसे मिलेगी धार
पीलीभीत, अमृत विचार। नगर निकाय चुनाव में मतदान 11 मई को होना है, यानी प्रत्याशियों के पास खुद को बेहतर साबित करने के लिए एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। समस्त ग्यारह प्रत्याशियों का प्रचार जोर शोर से चल रहा है। पीलीभीत नगर पालिका सीट की बात करें तो 2007 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने और जीत दर्ज कराने वाले प्रभात जायसवाल इस तरह काबिज हुए कि उसके बाद 10 साल से भाजपा की ही मुसीबत बन गए। दोबारा पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी नहीं बनाया और अन्य महिलाएं उम्मीदवार उतारे। एक गृहणी तो दूसरी चिकित्सा क्षेत्र से थीं।
मगर, दोनों ही बार निर्दलीय चुनाव लड़कर भाजपा को मात दे दी गई। भले एक बार आरक्षण की मार पड़ने पर पूर्व चेयरमैन को इस बार की तरह पत्नी विमला जायसवाल को उतारना पड़ा था। अबकी बार का चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंचने के बाद सत्ताधारी भाजपा की साख से जुड़ चुका है। ऐसे में जीत की राह तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है। बागी और निर्दलीय चिंता बड़ा गए हैं।
वहीं , अपनों का साथ मिलने पर भी संशय कम नहीं है। शायद यही वजह है कि सत्ता की पूरी फौज पीलीभीत नगर पालिका भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए उतार दी गई गईं है। ऐसे में कहीं न कहीं उनके चुनाव में कमजोर साबित होना माना जा रहा है। यही वजह है कि दिग्गजों की कतार धार लगाने को उतारी जाने लगी है। ऐसी ही कुछ तैयारी भी संगठन में चल रही है। मगर, असर तो मतदाता ही तय करेंगे। अब वरिष्ठ नेता और बाहरी जनप्रतिनिधि भी वोट मांगने के लिए उतारे जाएंगे। भाजपाइयों का उसे लेकर अपना अलग नजरिया है।
मगर, विपक्षी दल इसे प्रत्याशी के कमजोर पड़ने से जोड़कर और साख बचाने के लिए धार लगाने से जोड़कर देख रहे है। चर्चा तो यह भी तेज हो गई गई है कि राज्य और कैबिनेट मंत्रियों की आवाजाही तो होगी ही। वहीं मुख्यमंत्री या फिर उप मुख्यमंत्री की सभा कराने पर भी मंथन चल रहा है। ताकि कमजोर पड़ रहे प्रत्याशी के चुनाव में धार लगाई जा सके। खैर, जो भी हो लेकिन 13 मई को सारी स्थिति साफ हो जाएगी। मुकाबला केवल तीन प्रत्याशियों में ही देखा जा रहा है। इधर, सपा और दो निर्दलीय प्रत्याशी भी दमखम से उतरे हुए हैं।
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