हल्द्वानी: तराई के जंगलों में 14 मजारों का नहीं मिल रहा दावेदार

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वन विभाग ने नोटिस चस्पा कर दी मोहलत, वैधानिक प्रक्रिया के बाद 4 मजारें की ध्वस्त 

हल्द्वानी, अमृत विचार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सरकारी भूमि खासकर जंगलों में तेजी से बढ़ती मजारों व धार्मिक अवस्थापनों के खिलाफ सख्ती बरतने के निर्देश के बाद जंगलात सतर्क हो गया है। तराई के जंगलों में नोटिस व अन्य कानूनी कार्रवाई के बाद 4 मजारों को ध्वस्त कर दिया है। 

तराई पूर्वी वन डिवीजन के जंगल 82,489 हेक्टेयर में नैनीताल व ऊधम सिंह नगर जिले में नेपाल बॉर्डर तक फैले हुए हैं। तराई पूर्वी के जंगलों में 18 मजारें चिन्हित की गईं थीं। वन विभाग ने जंगलों पर काबिज इन मजारों के दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस चस्पा किए थे।

इन नोटिसों में मजारों पर मालिकाना हक जताने वालों को ब्योरा, दस्तावेज मुहैया कराने और स्वयं अतिक्रमण हटाने की मोहलत दी गई थी। वन अधिकारियों के अनुसार 18 में ऐसी 4 मजारें जिनका कोई दावेदार नहीं आया और दस्तावेजों में भी दर्ज नहीं थीं उन्हें ध्वस्त कर दिया गया है।

वहीं, 14 मजारों को लेकर दावेदारी का इंतजार किया जा रहा है। यदि दी गई मोहलत में दावेदार पेश हो जाते हैं तो सुनवाई की जाएगी। वरना नियमानुसार कार्रवाई के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। बता दें कि तराई के जंगलों में मुख्यमंत्री धामी के गृह क्षेत्र खटीमा में सबसे  ज्यादा मजारें चिन्हित की गई थीं।

डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि तराई के जंगलों में मजारों को लेकर नोटिस चस्पा किए गए हैं। जिन नोटिसों पर कोई जवाब नहीं आया और कोई दस्तावेज नहीं मिलने पर चार धार्मिक अवस्थापनाओं को ध्वस्त कर दिया है। 14 मजारों में दावेदारों का इंतजार किया जा रहा है।

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