बरेली: इस बार हरे रंग का भी कमल, मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा के लिए भी जमकर वोटिंग

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Edited By Amrit Vichar
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जिन वार्डों में थे कई-कई मुस्लिम प्रत्याशी वहां भाजपा बनी मुसलमानों की पसंद

बरेली, अमृत विचार : नगर निगम चुनाव में मुसलमानों का रुझान भाजपा की उम्मीदें जगाने वाला रहा। मुस्लिम बहुल इलाकों में सपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर की जीप जमकर दौड़ी लेकिन पहली बार पार्षद प्रत्याशियों के लिए भाजपा का कमल भी खिलता दिखा। खासतौर पर जिन वार्डों में मुस्लिम प्रत्याशियों की भरमार थी, वहां मतदाताओं का रुझान भाजपा प्रत्याशी की ओर ज्यादा दिखाई दिया।

भाजपा ने पिछले नगर निगम चुनाव में चार वार्डों में मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिए थे जिन्हें वोटरों ने सिरे से नकार दिया था। चार में से सिर्फ एक प्रत्याशी को चार प्रतिशत वोट मिल पाए थे, बाकी डेढ़-दो प्रतिशत में ही निपट गए थे।

इसके बावजूद भाजपा ने इस बार मुसलमानों के टिकट का कोटा बढ़ाकर नौ वार्डों में मुस्लिम प्रत्याशी उतारे। इनमें से एक दंगे का आरोपी निकल गया, बाकी आठ भाजपा के ही टिकट पर चुनाव लड़े। मुस्लिम इलाकों में इस बार भाजपा का यह प्रयोग कामयाब होता दिखाई दिया। मुस्लिम इलाकों में मतदाताओं के रुझान से साफ अंदाजा हुआ कि इस बार भारी संख्या में मुसलमानों का वोट भाजपा को गया है। कुछ मिश्रित आबादी वाले वार्डों में भी भाजपा का जलवा दिखा।

बमनपुरी, कंघीटोला, कानून गोयान, रोहली टोला, चाहबाई, नई बस्ती जैसे इलाकों में भारी तादाद में मुसलमानों ने रुख भाजपा प्रत्याशी के लिए मतदान किया। इन इलाकों में मेयर पद के प्रत्याशी डॉ.आईएस तोमर की जीप ने खूब रफ्तार भरी लेकिन भाजपा प्रत्याशी उमेश गौतम को भी कुछ इलाकों में मुसलमानों का अच्छा-खासा वोट मिलने की उम्मीद है। बसपा प्रत्याशी मोहम्मद यूसुफ और कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. केबी त्रिपाठी को भी मुस्लिम वोटरों का अच्छा समर्थन मिलने की चर्चा रही।

ईवीएम में साइकिल न होने से निराशा: मुस्लिम मतदाता किसी बात से निराश दिखा तो ईवीएम में साइकिल का सिंबल नहीं होने से। महापौर के लिए भले ही सपा ने ऐन मौके पर अपने प्रत्याशी को मैदान से बाहर कर पूर्व महापौर डॉ. आईएस तोमर को समर्थन दिया, लेकिन फिर भी तमाम लोग ईवीएम में साइकिल ढूंढते रहे। जिन वार्डों में सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे थे, उन प्रत्याशियों को अपने वोटरों को समझाने में काफी दिक्कत हुई।

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