Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शुआट्स के कुलपति की याचिका की खारिज

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप में सैम हिगिनबॉटम विश्वविद्यालय और प्रौद्योगिकी और विज्ञान, नैनी, प्रयागराज के कुलपति आरबी लाल और छह अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

दिवाकर नाथ त्रिपाठी नामक व्यक्ति द्वारा शुआट्स में प्रोफेसरों, सहायक प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों की अवैध रूप से और नियमों के विपरीत नियुक्तियों के संबंध में 2 फरवरी 2023 को आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7, 13 (1) (बी) के तहत थाना नैनी, प्रयागराज में मामला दर्ज कराया गया था। उपरोक्त प्राथमिकी को रद्द करने की मांग को लेकर आरबी लाल और 6 अन्य की ओर से दायर याचिका को न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति गजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने खारिज कर दिया।

शिकायतकर्ता की शिकायत के फलस्वरुप उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग द्वारा जारी पत्र एवं वित्त विभाग के पत्र के माध्यम से निदेशक, स्थानीय निधि लेखापरीक्षा द्वारा जांच की गयी। इस जांच से पता चला कि 1984-2017 की अवधि के दौरान 69 प्रोफेसरों, सहायक प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसरों को स्थापित मानदंडों के विपरीत नियुक्त किया गया था। इन नियुक्तियों में न्यूनतम योग्यता के मानदंड का पालन नहीं किया गया था। 

इसके साथ ही दो समाचार पत्रों में पदों का विज्ञापन नहीं दिया गया था। विज्ञापनों में आवेदन करने की अवधि निर्दिष्ट नहीं की गई थी। साक्षात्कार बुलावा पत्र जारी नहीं किए गए थे और चयन किए जाने के बाद परिणाम प्रकाशित नहीं किए गए थे। कुछ नियुक्तियां आवेदन आमंत्रित किए बिना भी की गईं। यह भी आरोप लगाया गया है कि नियोजित तरीके से अयोग्य व्यक्तियों को अवैध लाभ प्रदान किया गया और चयन प्रक्रिया के दौरान रिश्वत स्वीकार की गई, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ,जो एक आपराधिक कृत्य है। 

कोर्ट ने सभी तर्कों पर विचार करते हुए कहा कि विवादित प्रथम सूचना रिपोर्ट द्वारा उठाया गया मुद्दा मूल रूप से वित्तीय अनियमितताओं में से एक है, यदि यह विशेष लेखापरीक्षा रिपोर्ट पर आधारित है, तो कोई अवैधता प्रतीत नहीं होती है। लेखा परीक्षकों की एक टीम वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने और रिपोर्ट करने के लिए सबसे अच्छी तरह से सुसज्जित है।

 संस्था, सरकारी अनुदान सहायता सूची में है और वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही है। अत: यदि नियुक्तियां नियमों के विपरीत की गई हैं अथवा अपात्र व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है अथवा इसका उल्लंघन करते हुए सीधी भर्ती की प्रक्रिया का पालन किया गया है तो यह शासकीय निधि का अनुचित उपयोग अथवा दुरूपयोग है। अंत में कोर्ट ने पाया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों से संज्ञेय अपराध बनता है। अतः प्रथम सूचना रिपोर्ट को रद्द नहीं किया जा सकता है।

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