पीलीभीत: भाजपा की आस्था ने रोका जायसवाल का विजय रथ, विमला को ले डूबी मुद्दों की 'बरसात'

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। एक दशक बाद पीलीभीत नगर पालिका सीट पर आखिरकार भारतीय जनता पार्टी ने अपना कब्जा वापस ले लिया। निकाय चुनाव के बीच हुई दो दिन की बारिश में डेढ़ दशक से काबिज जायसवाल दंपति की जीप ऐसे बही कि कहीं टिक ही नहीं सकी। भाजपा प्रत्याशी आस्था अग्रवाल ने न सिर्फ कांटे की टक्कर दी बल्कि जीत दर्ज कर हार की हैट्रिक बचाने में भी कामयाब रही। जनता में पूर्व चेयरमैन का विरोध मद्दों की बरसात बनकर भाजपा के खूब काम आया।

2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिलने के बाद सूबे में भाजपा की एक लहर सी चल गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मैजिक मतदाताओं को साधने में प्रत्याशियों के काम आता रहा।

जनपद की चारों विधानसभा सीटों और सांसद भी भाजपा के ही है मगर, इस लहर में भी नगर पालिका पीलीभीत की चेयरमैन की कुर्सी पर काबिज होने में भाजपा विफल रही। इस सीट पर आलम यह था कि अपने ही द्वारा उतारे गए प्रत्याशी से भाजपा को लगातार दो बार शिकस्त मिली। 2006 में प्रभात जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और रिकार्ड जीत दर्ज कराई। वह 2011 तक चेयरमैन रहे। उसके बाद 2012 में हुए निकाय चुनाव में भाजपा के टिकट पर माधुरी मिश्र ने चुनाव लड़ा था।

टिकट न मिलने पर प्रभात जायसवाल निर्दलीय मैदान में उतरे और बड़े अंतर से जीत हासिल की। 2017 में सामान्य महिला आरक्षित सीट रही। जिसके चलते दो बार से जीत दर्ज करा रहे प्रभात जायसवाल चुनाव नहीं लड़ सके। मगर, उनकी पत्नी विमला जायसवाल पहली बार चुनावी मैदान में उतारी गईं। भारतीय जनता पार्टी ने डा. दिव्या मिश्रा पर दांव खेला।

इस चुनाव में विमला जायसवाल जीतीं। इसे प्रभात की हैट्रिक से जोड़कर देखा गया। इस बार के निकाय चुनाव में महिला सीट होने पर भाजपा ने तमाम दावेदारों के बीच डा. आस्था अग्रवाल को टिकट दिया। भितरघात और बगावत भी कम नहीं हुई। पूर्व चेयरमैन विमला जायसवाल निर्दलीय चुनाव लड़ी।

भाजपा के बागी भी चुनाव में थे। ऐसे में इस सीट पर हार की हैट्रिक बचाने की चुनौती डा. आस्था अग्रवाल के सामने थी। विपक्ष भाजपा प्रत्याशी के बाहरी होने का मुद्दा उठाता रहा। उधर, भाजपा संगठन ने इस सीट पर विजय परचम लहराने के लिए ताकत झोंक दी। संगठन के कई बड़े नेताओं ने पीलीभीत में डेरा जमा लिया। जनसभाएं की और घर-घर जाकर वोट मांगे।

जायसवाल दंपति को शहर की तमाम समस्याएं अतिक्रमण, ड्रेनेज सिस्टम, कूड़ा उठान, प्रकाश व्यवस्था आदि पर घेरा। चुनावी माहौल में हुई दो दिन की बरसात में शहर की सड़कों पर जलभराव हुआ तो मुद्दा बन गया। मतदाताओं में भी इसका बड़ा असर दिखाई दिया।

11 मई को मतगणना हुई और परिणाम सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया। 15 साल से नगर पालिका अध्यक्ष पद की कुर्सी पर काबिज जायसवाल दंपति शुरुआत से ही आस्था के आगे पटखनी खाता दिखाई दिया। डा. आस्था ने 19066 वोट हासिल किए। जबकि सपा प्रत्याशी नसरीन अंसारी को 18268 मत मिले।

भाजपा की आस्था ने 798 वोट से जीत दर्ज की। इस सीट पर पूर्व चेयरमैन विमला जायसवाल को सिर्फ 5735 वोट ही मिल पाए। जोकि पिछली बार की जीत के अंतर से भी काफी कम हैं। बता दें कि पिछली बार उनकी जीत ही सात हजार से अधिक मतों से हुई थी। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जनता ने एक सिरे से उन्हें नकार दिया।

कुछ देर रुके और फिर चल दिए जायसवाल
तीन बार से पीलीभीत सीट पर जीत दर्ज कराने वाले जायसवाल दंपति को जैसे ही मतगणना शुरू हुई और लगातार बूथों की हकीकत दिखी। उसे करारी शिकस्त का अंदाजा हो गया था। यही वजह रही कि कुछ देर तक तो वह मतगणना पर नजर बनाए रहे। मगर, जब पिछड़ते गए तो मौके पर रुके नहीं। मतगणना स्थल से वह चले गए। हालांकि उनके कुछ एजेंट जरूर मौके पर थे। मगर, मतदाता के जरिए तीन चुनाव बाद नकारने का असर सभी के चेहरों पर था।  

जीत ने कई अपनों को भी दे दिया करारा झटका
भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी डा. आस्था अग्रवाल की पीलीभीत नगर पालिका सीट पर हुई जीत संगठन की साख बचा ले गई हैं। पिछले दो चुनाव में भाजपा की महिला प्रत्याशी करारी शिकस्त झेल रही थीं। इस बार भी भाजपा की आस्था में भितरघात और बगावत ने कम रुकावटें नहीं डाली।

बताते हैं कि कई चेहरे ऐसे भी थे जोकि वोट मांगने के वक्त तो साथ रहे लेकिन उसके बाद हराने के लिए पैंतरेबाजी भी कम नहीं की गई। ऐसे में जैसे ही आस्था की जीत की घोषणा हुई कई अपनों को भी करारा झटका मिला। चूंकि अब भाजपा चेयरमैन बना चुकी थी तो दूरी बनाने वाले भी फूलमाला लेकर पहुंचे और बधाईयां देकर खुद की मेहनत का अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनकर गुनगान किया जाने लगा। इसकी चर्चाएं भी हर तरफ रही।

पीलीभीत सीट का ये है परिणाम
डा. आस्था अग्रवाल (भाजपा)   : 19066
नसरीन अंसारी (सपा)             : 18268
प्रियंका कौशिक (निर्दलीय)       : 6065
विमला जायसवाल (निर्दलीय)    : 5735
उर्मिला गौतम (बसपा)             : 1511
कमरुल निशा (कांग्रेस)            : 1605
शबाना खान (रालोद)              : 622
आकांक्षा अग्रवाल (निर्दलीय)    : 778
मीरा अग्निहोत्री (निर्दलीय)       :  423
सावित्री देवी (निर्दलीय)           : 137
नोटा                                   : 167

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