संभल : तैराकी में परचम लहरा रहीं 72 वर्षीय चंदा देवी, अब तक 100 से अधिक मेडल जीते
दिसंबर में हरियाणा में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीता सिल्वर पदक, अब तक प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 100 से अधिक बार जीते मेडल
श्याम मिश्रा,अमृत विचार। चननगर की चंदा देवी 72 साल की आयु में भी तैराकी में सफलता का परचम लहरा रही है। बचपन में नदी पार करते समय तैरना सीखा। स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगने पर 25 साल की आयु में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2011 में सेवानिवृत्ति के बाद घर में ही स्वीमिंग पूल बनवा लिया और उसी में प्रतियोगिताओं की तैयारी करती हैं। अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की प्रतियोगिता में 100 से अधिक मेडल जीत चुकी है। उन्होंने दिसंबर 2022 में हरियाणा के अंबाला में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर पदक जीता।
नगर के मोहल्ला लोधियान निवासी चंदा देवी के तैराक बनने की कहानी भी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। चंदा देवी का मायका अमरोहा जिले की हसनपुर तहसील के गंगा किनारे बसे गांव दढ़ियाल का है। उनकी शादी चंदौसी निवासी केसरी लाल से हुई थी। पति बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक थे। शादी के बाद चंदा देवी की नौकरी स्वास्थ्य विभाग लग गई थी।
बकौल चंदा देवी मुरादाबाद में तैनाती के दौरान टीवी पर खेलों के कार्यक्रम चल रहे थे। महिला तैराकों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेते देख उनके मन में भी तैराक बनने की इच्छा हुई। अपनी इच्छा पति को बताई। कहा कि वह तैरना जानती है। पति ने सहयोग किया और उन्हें अपने साथ लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में ले गए। वहां उनका तैराकी का टेस्ट हुआ। इसमें वह पास हो गईं। एक माह लखनऊ में रहकर तैराकी का अभ्यास किया। वह तैराकी में ड्राइविंग व बटरफ्लाई में प्रतिभाग करती थीं। 1988 में पहली बार लखनऊ में ऑल इंडिया कम्पटीशन में प्रतिभाग किया। इसमें सिल्वर व कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ती रहीं।
अब तक 100 से अधिक मेडल जीते
चंदा देवी स्वीमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से प्रतियोगिता में प्रतिभाग करती थीं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित तमिलनाडु, हैदराबाद, केरल, गुजरात के राजकोट, हरियाणा के अंबाला, चेन्नई, आंध्र प्रदेश, मुंबई, मध्य प्रदेश के इंदौर में कई प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। यह सिलसिला अभी भी जारी है। अब तक 100 से अधिक गोल्ड, सिल्वर, कांस्य पदक और प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुकी है। तैराकी के प्रति उनका जज्बा अभी भी बरकरार है। दिसंबर 2022 में हरियाणा के अंबाला में तैराकी प्रतियोगिता में भाग लेकर सिल्वर व कांस्य पदक जीता।
पति ने दिलाई चंदा को कामयाबी
चंदा देवी ने बताया कि तैराकी प्रतियोगिता में भाग लेने की बात अपने पति केसरी लाल से कही। उस जमाने में कम ही महिलाएं खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेती थीं। मगर उनके पति ने उनकी प्रतिभा को देखा और पूरी मदद की। उन्होंने अपने पति की वजह से ही तैराकी में कामयाबी हासिल की। उनका एक पुत्र राजू है। दो वर्ष पहले पति की मौत हो चुकी है। वह अपने पुत्र के साथ रहती हैं।
महाबा नदी में सीखा तैरना, अब घर के स्वीमिंग पूल में करती हैं तैयारी
चंदा देवी ने बताया कि उनका मायका अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव दढ़ियाल का है। जब वह 12 वर्ष की थीं तब उनके गांव के पास ही महाबा नदी गुजरती थी। नदी के दूसरी ओर उनके खेत थे। इसलिए प्रतिदिन खेत पर फसल देखने के लिए वह नदी में तैर कर जाती थीं। उस समय उन्होंने खुद ही तैरना सीखा। आगे चलकर यही उनकी पहचान बन गया। अब 2011 में सेवानिवृत्ति के बाद घर में स्वीमिंग पूल बनवा लिया। उसी में प्रतियोगिता की तैयारी करती हैं।
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