बरेली: श्रमिकों को नहीं दिया काम, 144 ग्राम पंचायतों को नोटिस

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54 दिन की समीक्षा में लापरवाही हुई उजागर, प्रधान और सचिव से मांगा जवाब

बरेली, अमृत विचार। ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना सिर्फ दिखावा साबित हो रही है। जांच में जिले के 144 गांवों में 54 दिनों से योजना बंद पड़ी है। चेतावनी के बाद भी इन गांवों में एक भी श्रमिक को काम नहीं दिया गया। लापरवाही उजागर होने पर ग्राम प्रधान और सचिवों से जवाब मांगा है।

1 अप्रैल से शासन ने गांव में अधिक से अधिक मनरेगा श्रमिकों को काम मिले इसलिए मजदूरी में वृद्धि करते हुए 230 रुपये प्रतिदिन की लेकिन ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के स्तर से प्रभावी तरीके से मानीटरिंग नहीं होने से वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह योजना जिले में फ्लाॅप साबित हो रही है।

आलम यह है 54 दिन बीत जाने के बावजूद 54 ग्राम पंचायतों मनरेगा योजना के तहत एक भी मजदूर को काम नहीं मिला है। गांव में रोजगार नहीं मिलने से श्रमिक आर्थिक तंगी से परेशान हैं। अफसरों के मुताबिक इसके अलावा कई ग्राम पंचायतें ऐसी भी सामने आई हैं जहां योजना में समय से श्रमांश और सामग्री अंश का भुगतान करने में ग्राम प्रधान और सचिव रुचि नहीं दिखा रहे हैं। फिलहाल इस मामले में संबंधित सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों का जवाब तलब करने के साथ ही व्यवस्था दुरुस्त नहीं पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

बहेड़ी और भुता का प्रदर्शन सबसे खराब
जिले के 15 ब्लाक में 1193 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें मनरेगा मजूदरों को काम देने में सबसे खराब स्थित बहेड़ी और भुता ब्लाक की सामने आई है। 30 गांव भुता तो वहीं 28 गांव बहेड़ी के शामिल हैं। इसके अलावा आलमपुर जाफराबाद के 3, भदपुरा के 2, भोजीपुरा के 10, बिथरी चैनपुर के 3, फरीदपुर के 1, फतेहगंज पूर्वी के 5, क्यारा के 12, मझगवां के 7, मीरगंज के 18, नवाबगंज के 12, रिछा के 10 और शेरगढ़ के 3 गांव शामिल हैं।

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