Jalaun: अरे साहब मैं तो जिंदा हूं, मुझे मृत दिखाकर, रोक दी पेंशन, 70 साल की विधवा लगा रही अधिकारियों के चक्कर
जालौन में जिंदा को मृत दिखाकर विधवा पेंशन रोक दी।
जालौन में जिंदा को मृत दिखाकर विधवा पेंशन रोक दी। 70 साल की विधवा अधिकारियों के चक्कर लगा रही।
जालौन, अमृत विचार। अरे साहब मैं तो जिंदा हूं फिर भी मुझे मृत दिखाकर सरकार की ओर से मिलने वाली विधवा पेंशन को रोक दिया गया है। यह शिकायत है ग्राम पंचायत सरावन के मजरा खितौली गांव की रहने वाली 70 वर्षीय राजेश्वरी देवी की। वृद्धा ने अधिकारियों को लिखित शिकायती पत्र देकर हकीकत से रूबरू कराया है। पेंशन के लिए ग्राम प्रधान से लेकर उरई तक के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया।
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत सरावन के मजरा खितौली गांव की रहने वाली राजेश्वरी देवी के पति ठकुरी की मौत तकरीबन 40 वर्ष पूर्व हुई थी। इसके बाद वह मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों की परवरिश की। बुढापा जब आया तो वह अपने बेटे छोटे के साथ जीवन यापन करने लगी। इस दौरान सरकार की विधवा पेंशन योजना के तहत उसे विधवा पेंशन मिल रही थी। मिलने वाली पेंशन से उसकी छोटी मोटी जरूरत पूरी होने लगी।
लॉक डाउन के दौरान उसके बेटे छोटे की मौत हो गई। इसके बाद वह अपने को बिल्कुल अकेली समझने लगी। हालांकि उसके दो और बेटे हैं लेकिन वह अपने परिवार के साथ बाहर रहते हैं। जमीन उसके पास नहीं है । विधवा राजेश्वरी का कहना है कि इस समय वह पूरी तरह से अकेली है विधवा पेंशन के सहारे उसका जीवन कट रहा था तकरीबन 8 माह पहले उसे विधवा पेंशन योजना से भी वंचित कर दिया गया लगातार बैंक के चक्कर काटती रही हर बार उसे यही जवाब मिला कि अभी तुम्हारी पेंशन नहीं आई है।
राजेश्वरी का कहना है कि वह गांव के प्रधान के यहां तीन बार अपनी फरियाद लेकर गई, लेकिन हर बार उसे टहला दिया गया। इसके बाद परेशान होकर वह उरई गई तो उसे पता चला कि वह कागजों में तो मृत दर्शाई जा चुकी है। जिंदा होते हुए भी मौत की खबर से वह परेशान हो गई।
सोमवार को एसडीएम माधौगढ़ के यहां राजेश्वरी ने शिकायती पत्र दिया और अपने आधार कार्ड से लेकर बैंक पासबुक के सभी कागजात प्रस्तुत कर अपने को जिंदा बताया। यह देखकर एसडीएम साहब भी चौक गए। उन्होंने उक्त वृद्ध महिला को आश्वस्त किया कि जल्द ही उनके बैंक खाते में पेंशन पहुंचेगी आप टेंशन न लें।
आखिर किसने राजेश्वरी को मृत दर्शा दिया
राजेश्वरी देवी जब जिंदा है तो आखिर किसने उन्हें मृत दर्शा दिया। अगर कोई सत्यापन किया गया तो सत्यापन का आधार क्या था? ये तमाम सवाल है जो वृद्धा के मृत दिखाने के बाद उठ रहे। ये जिस पटल पर गड़बड़ी हुई है उसने वृद्धा को पेंशन का ऐसा टेंशन दिया कि उसे गांव से निकलकर अपने को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों की चौखट पर जाना पड़ रहा है।
