पीलीभीत: कोई भी काम हो कराना सचिव न मिलें तो प्राइवेट कर्मचारी के पास जाना, जानिए क्या है खेल

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। ग्राम पंचायत में लोग न भटकें, इसके लिए ग्राम सचिवालय बनाए गए थे। सचिव की जिम्मेदारी तय की गई। मगर जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। अधिकतर सचिव सचिवालयों में बैठकर काम नहीं करते हैं, बल्कि उनके पास रखे हुए प्राइवेट कर्मचारी अपने तरीके से काम कर रहे हैं। यह कर्मचारी सरकारी कामकाज से लेकर भुगतान तक का काम संभाल रहे हैं।

ग्राम पंचायत का कोई भी काम करना हो तो सचिव से नहीं उनके द्वारा रखे गए प्राइवेट कर्मचारी के पास जाना पड़ता है। जहां ग्रामीणों का बिना रुपये दिए कोई भी कार्य नहीं होता है। इससे भष्ट्राचार को भी खूब बढ़ावा मिल रहा है। जिम्मेदार भी इससे अनजान बने बैठे हुए हैं। सचिव अपने प्राइवेट कर्मचारियों के साथ ब्लॉक पर बने आवासों में अपना डेरा जमाए बैठे हुए हैं। लेकिन फिर भी अफसरों की ओर से सचिवों पर सख्ती नहीं की जा सकी है।

जिले में 720 ग्राम पंचायत हैं। ग्राम प्रधान के अलावा अन्य सरकारी योजना का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचने के लिए सचिवों की तैनाती की गई है। एक-एक सचिव के पास 10-10 ग्राम पंचायतों का जिम्मा है। ग्रामीणों को असुविधा न हो इसके लिए ग्राम पंचायतों में सचिवालय भी बनवाए गए। ताकि सचिव और अन्य अफसर वहां बैठकर  ग्रामीणों की समस्या सुनकर उनका निस्तारण करें। लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां सचिवों ने अपने प्राइवेट कर्मचारी रखे हुए हैं।

जो सचिव का पूरा काम संभालते हैं। चाहे फिर बात भुगतान की, हो या फिर किसी अभिलेख। सभी गोपनीय दस्तावेज के हाथ से होकर निकलते हैं। साथ ही समस्या लेकर आने वाले ग्रामीणों से भी बिना रुपये लिए कोई काम नहीं किया जाता है। अमृत विचार की टीम ने शुक्रवार को पड़ताल की  तो अधिकांश सचिवालयों में कोई भी नहीं मिला। मरौरी ब्लॉक में जब चेक किया गया तो दफ्तर में कोई सचिव नहीं मिला। लेकिन वहां बने सरकारी आवासों में सचिवों के ऑफिस चलते मिले।

जहां सचिव की कुर्सी पर प्राइवेट कर्मचारी सरकारी कार्य निपटते हुए मिले। कुछ को भनक लगी तो वह कुर्सी छोड़कर खिसक लिए। तो कुछ फोटो खींचने के बाद सकपका गए। मरौरी ब्लॉक में सचिव अनिल कुमार के पास धर्मेंद्र कुमार नाम का प्राइवेट कर्मचारी काम करता मिला। जब उसे सचिव की जानकारी ली गई। तो उसने बताया कि साहब अभी आए नहीं है। लेकिन वह वहां सरकारी काम करता मिला। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में भी कुछ इस तरह ही काम चल रहा है।

सभी सचिवों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वह सचिवालय में बैठकर काम करेंगे। कोई भी सरकारी कार्य प्राइवेट कर्मचारी के द्वारा नहीं कराया जाएगा। अगर ऐसा हो रहा है। तो गलत है। इस संबंध में बीडीओ को पत्र जारी किया जाएगा। कोई भी सचिव ब्लॉक पर अपने आवासों या प्राइवेट कर्मचारी से काम करता पाया गया। तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी--- वाचस्पति झा डीपीआरओ।

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