मादा मगरमच्छ ने बिना नर से संबंध बनाए दिए अंडे, 16 साल से रह रही थी अकेले...वैज्ञानिक हैरान

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

Female Crocodile Eggs: सोशल मीडिया पर अजीबोगरीब खबर सामने आती रहती है। दुनिया बड़े अजब-गजब रहस्यों से भरी पड़ी है। कई बार इसके सबूत मिल जाते हैं, जो चौंका देने वाले होते है। इस बीच वैज्ञानिकों ने खुलासा किया कि एक मगरमच्छ (Crocodile) बिना नर से संबंध बनाए गर्भवती हो गई है, अंडे दे सकती हैं। बता दें कि ये बात 2018 की है, लेकिन स्टडी अब तक चल रही थी। जिसका अब खुलासा हो गया है। 

वैज्ञानिकों के उड़े होश
वैज्ञानिकों ने यह खुलासा किया कि मादा मगरमच्छों में यह काबिलियत होती है। इससे डायनासोरों के समय के माहौल के सबूत भी मिल रहे हैं। हैरान कर देने वाले इस मामले में चिड़ियाघर में 16 साल से बंद एक अमेरिकी मादा मगरमच्छ (Crocodile) ने कुछ अंडे दिए। जिसमें से एक अंडे में उसके जैसी ही मादा मगरमच्छ थी। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने जब यह नजारा देखा तो उसके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने इस प्रक्रिया की जेनेटिक स्टडी की।

मगरमच्छों में वर्जिन बर्थ 
इस स्टडी में पता चला कि मगरमच्छों में वर्जिन बर्थ (Virgin Births) की काबिलियत होती है। इस प्रोसेस को पार्थेनोजेनेसिस कहा जाता है। यानी गर्भधारण की ऐसी प्रक्रिया जिसमें मादा को नर की जरुरत नहीं होती। सोचिए अगर यह प्रक्रिया करने की काबिलियत इंसानों में आ जाए तो क्या होगा। हैरानी इस बात की थी कि सारे अंडों से बच्चे नहीं निकले, लेकिन वैज्ञानिक जानना चाहते थे कि आखिर यह प्रक्रिया कितनी पुरानी है। कितने वर्षों से मगरमच्छ या उनके पूर्वज यानी डायनासोर इस तरह से बच्चे पैदा कर रहे हैं। क्या यह गर्भधारण की कोई प्राचीन प्राकृतिक रणनीति है, जिसमें नर की जरुरत न हो।

डायनासोर भी करते थे ऐसा
वैज्ञानिकों ने स्टडी में जाना कि हो सकता है कि इस तरह की प्रक्रिया पहले डायनासोर अपनाते रहे हों। लेकिन अब मगरमच्छों में भी वर्जिन बर्थ की प्रक्रिया देखी जाने लगी है। मगरमच्छ और पक्षी दरअसल आर्चोसॉरस के परिवार से आते हैं, जिनमें उड़ने वाले डायनासोर भी शामिल थे। जो उड़ सकते थे, वे पक्षी बन गए और जो नहीं उड़ पाए वो मगरमच्छ।

क्या है पार्थेनोजेनेसिस?
वर्जीनिया टेक के इवोल्यूशनरी बायोलॉजिस्ट वॉरेन बूथ का कहना है कि यह खोज हैरान करने वाली है। इससे हमें प्राचीन डायनासोर यानी आर्चोसॉरस की वर्तमान पीढ़ी के रिप्रोडेक्शन सिस्टम का पता चलता है। आमतौर पार्थेनोजेनेसिस (parthenogenesis) वह प्रक्रिया है, जिसमें मादा अकेले ही बच्चे पैदा करती है। उसे गर्भधारण करने के लिए नर के वीर्य की जरुरत नहीं होती। 

पार्थेनोजेनेसिस (parthenogenesis) में यह भी होता है कि मादा रेप्टाइल्स यानी मादा सरिसृप कई बार नरों के वीर्य को कई वर्षों तक अपने शरीर में स्टोर करके रख सकते हैं। उनसे गर्भधारण कर लें या फिर मादा मगरमच्छ अपनी ही दो कोशिकाओं को मिलाकर संभावित भ्रूण का निर्माण कर लेती हैं। यानी वह अकेले ही नए बच्चों की मां और पिता दोनों बन जाती है।

कैसे गर्भधारण करते हैं जीव?
पौधे और बिना रीढ़ की हड्डी वाले जीव अक्सर यह प्रक्रिया अपनाते हैं, लेकिन रीढ़ की हड्डियों वाली 80 प्रजातियों में भी यह क्षमता पाई गई है। इन प्रजातियों छिपकलियां, सांप, शार्क, रे आदि शामिल हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब मादा नर से दूर रहे या फिर चिड़ियाघर में अकेला छोड़ दिया जाए, जहां नर से उनका संपर्क न रहे।

ये भी पढ़ें- मगरमच्छों में बिना निषेचन जन्म का पहला मामला, विज्ञान की किताबों के लिए क्या बनेगा इतिहास?