प्रतिकूल हालात

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत की मुश्किलें अभी भी जारी हैं। मांग में कमी के कारण देश का निर्यात मई में 10.3 प्रतिशत घटकर 34.98 अरब डॉलर रह गया। जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 61.13 अरब डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय के गुरुवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई में देश का आयात भी 6.6 फीसदी घटकर 57.1 अरब डॉलर पर आ गया।

आयात एवं निर्यात के आंकड़े दर्शा रहे हैं कि वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर प्रतिकूल हालात अब भी बने हुए हैं। किसी भी देश का आयात और निर्यात उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर असर डालते हैं। भारत दुनिया में सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और वस्तुओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी दो फीसदी से ज्यादा कभी नहीं रही। इसे देखते हुए निर्यात हिस्सेदारी नगण्य ही है।

यदि निर्यात के मामले में हम पीछे हैं तो इसका एक कारण बड़े पैमाने पर उत्पादन में पीछे रह जाना भी है। पिछले दिनों फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के कार्यक्रम में यह बात एक मत से रेखांकित हुई थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध में तेजी से आने वाला समय देश से निर्यात के लिए काफी चुनौतीपूर्ण व कठिन होने जा रहा है।

नीतियों में जल्दी-ज्ल्दी बदलाव की वजह से निवेशकों को निश्चितता  का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमें निर्यात के नए बाजार खोजने होंगे। निर्यात बढ़ाने के लिए हमें अलग-अलग क्षेत्रों पर ध्यान देते हुए उनके लिए बाजार के मद्देनजर विशिष्ट रणनीति बनानी होगी। हालांकि वाणिज्य विभाग और उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग निर्यात प्रोत्साहन की रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें 40 देशों के साथ व्यापार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब निर्यात बढ़ाने के लिए एक अप्रैल 2023 से लागू नई विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) का कारगर क्रियान्वयन जरूरी है। चूंकि विदेश व्यापार नीति का लक्ष्य निर्यातकों के लिए व्यवसाय करने की सुगमता को सरल बनाने के लिए प्रोसेस रि-इंजीनियरिंग तथा ऑटोमेशन पर ध्यान केंद्रित करना है। 

इस नीति का फोकस स्कोमेट के तहत ड्यूल यूज हाई एंड टेक्नोलॉजी आइटम्स जैसे उभरते क्षेत्रों, ई-कॉमर्स निर्यात को सुगम बनाने, निर्यात संवर्धन के लिए राज्यों तथा जिलों के साथ गठबंधन करने पर भी है। विदेश व्यापार नीति (2023) एक नीतिगत दस्तावेज है जो निर्यात को सुगम बनाने वाली समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली योजनाओं की निरंतरता पर आधारित है तथा एक ऐसा दस्तावेज है जो द्रुतगामी है और व्यापार की आवश्यकताओं के प्रति उत्साहपूर्वक अनुकूल है।

ये भी पढ़ें- महत्वपूर्ण यात्रा