गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का विरोध हमारी संस्कृति एवं धर्म का अपमान: सीएम शिवराज
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गीता प्रेस को वर्ष 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की आलोचना करने को लेकर मंगलवार को कांग्रेस को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस को मिले सम्मान का विरोध करना हमारी संस्कृति, परंपराओं, जीवन मूल्यों एवं हमारे धर्म का अपमान है। कांग्रेस ने गीता प्रेस को पुरस्कार दिए जाने की आलोचना की थी और इसे पुरस्कार ‘उपहास’ बताया था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा था, यह फैसला वास्तव में एक उपहास है तथा सावरकर एवं गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है। रमेश हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर और महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का जिक्र कर रहे थे। कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर चौहान ने यहां संवाददाताओं से कहा, बचपन से ही मैंने गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित आध्यात्मिक साहित्य पढ़ा है। इसने हमें आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित किया। मैं गीता प्रेस का बहुत सम्मान करता हूं।
उन्होंने कहा, अगर गीता प्रेस नहीं होती तो शायद कई धर्म ग्रंथ जनता तक नहीं पहुंच पाते। गीता प्रेस को दिए गए सम्मान का विरोध करना हमारी संस्कृति, परंपराओं, जीवन मूल्यों और हमारे धर्म का अपमान है। इसको जनता सहन नहीं करेगी। गीता प्रेस की शुरुआत वर्ष 1923 में हुई थी और यह दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है, जिसने 14 भाषाओं में 41.7 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की हैं। इनमें श्रीमद्भगवद्गीता की 16.21 करोड़ प्रतियां शामिल हैं।
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