अमरोहा: तिगरी में गंगा का जलस्तर बढ़ा, घाट व पुरोहितों की झोपड़ियां जलमग्न
बिजनौर बैराज से छोड़ा गया 28 हजार क्यूसेक पानी, खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ी, किसानों को फसलों की चिंता
गंगा के बढ़ते पानी में डूबीं पुरोहितों की झोपड़ियां।
गजरौला (अमरोहा), अमृत विचार। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश और बिजनौर बैराज से 28,937 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से तिगरी गंगा का जलस्तर बढ़ गया। गंगा घाट व उनके पास बनी पुरोहितों की झोपड़ियां जलमग्न हो गईं। इससे खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ गई है। मंगलवार को यहां 199.75 सेमी जलस्तर दर्ज किया गया।
बारिश के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। गंगा में हर साल बाढ़ आ जाने पर टापू में बसे गांवों के साथ ही तिगरी, पपसरा खादर, चकनवाला, मोहरका पट्टी, कांकाठेर, ओसीता जगदेवपुर, मोहम्मदाबाद, कबीरपुर के ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाढ़ से उपरोक्त गांवों के किसानों की हजारों बीघा फसल जलमग्न हो जाती है।
चारा, सब्जी, मैंथा, मक्का की फसल को बाढ़ से खासा नुकसान होता है। निचले इलाकों में बाढ़ के कारण फसल बर्बाद हो जाती है। जिससे बाढ़ आते ही आस पास के ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं। मंगलवार को जलस्तर बढ़ने पर तिगरी गंगा के किनारे रखी झोपड़ियों को पुरोहितों ने पीछे हटा लिया। बाढ़ खंड तिगरी के जेई अनवार बहादुर खान ने बताया कि तिगरी गंगा का जलस्तर अभी खतरे से काफी दूर है।
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