बरेली: जेल में बंदी तैयार कर रहे आयुष वाटिका, वाटिका में लगाई गई कई जड़ी बूटियां

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Edited By Amrit Vichar
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बंदियों को आयुर्वेद से जोड़ने के लिए जेल प्रशासन का प्रयास

दिग्विजय मिश्रा, बरेली, अमृत विचार : केन्द्रीय कारागार-दो में बंदी जेल परिसर में आयुष वाटिका तैयार कर उसकी देखभाल कर रहे हैं। वाटिका में दर्जनों तरह के औषधीय पौधे लगाए गए हैं। जेल प्रशासन का उद्देश्य बंदियों को आयुर्वेद से जोड़ने का है। इसमें औषधीय पौधों को तैयार कर बिक्री करने की तैयारी हो रही है। वाटिका में लगाए गए कई औषधीय पौधों को जेल प्रशासन हिमाचल के पहाड़ों से मंगाकर लगाया है।

बरेली जेल में बनी आयुष वाटिका को देखते हुए मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार और शाहजहांपुर में भी हाल ही में इसी तर्ज पर शुरुआत की गई थी। जेल प्रशासन बंदियों को उच्च स्वास्थ्य और प्रकृति से जोड़ने के लिए कारागार में आयुष वाटिका विकसित कर रहा है।

वाटिका की देखभाल से लेकर पौधे उगाने तक का काम जेल में बंदियों द्वारा कराया जाता है। अपनी सामान्य शारीरिक परेशानियों को बंदी आयुर्वेद से ही ठीक कर सकें, इसके लिए बंदियों को बीच-बीच में जानकारी भी दी जाती है। आयुष वाटिका में बेसिल, एलोवेरा, अकरकरा, तुलसी, काली तुलसी, अजवाइन, स्टीविया, पुदीना, बेल, सहजन, गिलोय, जटामासी समेत अन्य पौधे लगाए गए हैं।

जेल प्रशासन का कहना है कि जेल परिसर में बीच-बीच में आयुर्वेदाचार्य को बुलाकर बंदियों को आयुर्वेद के बारे में जानकारी भी कराई जाती है। ताकि जेल में बंद बंदी आयुर्वेद के जरिए कैसे स्वस्थ रहें यह जान सकें। कौन सी बूटी या पौधा कौन सी बीमारी को दूर करता है, इसके बारे में स्वयं आयुर्वेदाचार्य बंदियों को बताते हैं। इन जड़ी-बूटियों का प्रयोग भी सिखाते हैं।

जेल परिसर में बंदी ''''आयुष वाटिका'''' की देखभाल कर रहे हैं। आयुष वाटिका में दर्जनों तरह के औषधीय पौधे लगाए गए हैं। बंदियों को उच्च स्वास्थ्य और प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।-विपिन कुमार मिश्रा, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, केन्द्रीय कारागार दो

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