बरेली: कुपोषित बच्चों का पुष्टाहार खा जाएं अफसर...तब भी धूल फांकती है जांच रिपोर्ट, जानें मामला
इधर और उधर में फंसा मामला : उपनिदेशक की जांच में चार महीने पहले दोषी पाए गए थे डीडीओ, अब प्रभारी डीपीओ के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति
बरेली, अमृत विचार। भ्रष्टाचार की तमाम मामलों की जांच रिपोर्ट प्रशासन से शासन तक डंप पड़ी हुई हैं। एक मामला कुपोषित बच्चों के पुष्टाहार में गोलमाल का भी है, जिसकी जांच बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की उपनिदेशक चार महीने पहले ही करके रिपोर्ट दे चुकी हैं लेकिन यह रिपोर्ट अब तक शासन में धूल फांक रही है।
अब कमिश्नर के आदेश पर दोबारा जांच में भी यह खेल उजागर हुआ। दिलचस्प यह है कि उपनिदेशक की रिपोर्ट में तत्कालीन कार्यवाहक डीपीओ/डीडीओ अरुण कुमार दोषी बताए गए थे लेकिन अब कमिश्नर ने मौजूदा प्रभारी डीपीओ कृष्ण चंद्र के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेजी है।
सरकारी सिस्टम में भ्रष्टाचार की सीमाएं किस कदर टूट रही हैं, कुपोषित बच्चों का पुष्टाहार बाजार में बेचकर पैसा कमाना उसकी दिल हिलाने वाली मिसाल थी, लेकिन इसके बावजूद तीन महीने से शासन में जांच रिपोर्ट दबी हुई है। यह जांच मार्च में शासन से ही आई विभाग की उपनिदेशक सत्यवती सरोज ने की थी।
इस दौरान आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक में सीडीपीओ की साठगांठ से क्विंटलों पुष्टाहार बाजार में बेच देने और उसे चोरी होना बताकर थाने में एफआईआर दर्ज कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। शहर और बाकी ब्लॉकों में भी गोलमाल मिला।
उस दौरान डीपीओ का चार्ज डीडीओ अरुण कुमार पर था, लिहाजा उपनिदेशक में अपनी रिपोर्ट में उन पर कार्रवाई और जिले के सभी सीडीपीओ की जांच कराने सिफारिश करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी दी, मगर इस रिपोर्ट पर कुछ नहीं हुआ। घोटाला पकड़े जाने के बाद स्थानीय स्तर पर जरूर इतना किया गया कि डीडीओ से डीपीओ का चार्ज ले लिया गया।
हाल ही में पुष्टाहार में गोलमाल का मामला जानकारी में आने के बाद कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने भी संयुक्त विकास आयुक्त और उपायुक्त खाद्य एवं रसद से जांच कराई। इसमें भी पुष्टाहार में गोलमाल की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में लंबे समय से घालमेल होने की भी आशंका जताई गई।
इसके बाद कमिश्नर ने प्रभारी डीपीओ कृष्णचंद्र और शहर की सीडीपीओ राजकुमारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेज दी है। इसके बाद नया सवाल उठ खड़ा हुआ है कि डीडीओ अरुण कुमार दोषी हैं या कृष्ण चंद्र। अगर दोनों दोषी हैं तो क्या दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी या अरुण कुमार की तरह कृष्ण चंद्र भी बच जाएंगे।
सीतापुर में सवा तीन करोड़ का घोटाला... रंग यहां भी दिखा, गोलमाल का भी और साहब का भी
दरअसल, शहर के 52 आंगनबाड़ी केंद्र साल भर से बंद पड़े हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर करीब तीन हजार कुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों के साथ इन बंद पड़े केंद्रों के नाम पर साल भर से ही करीब साढ़े छह सौ गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी पुष्टाहार आवंटित किया जा रहा था।
यह सारा पुष्टाहार बाजार में ठिकाने लगाकर नीचे से ऊपर तक लोग कुपोषित बच्चों के हिस्सा हड़प रहे थे। मौजूदा प्रभारी कृष्ण चंद्र को एक जून को चार्ज मिला है, इससे पहले डीडीओ अरुण कुमार पर चार्ज था मगर फिर भी उनका नाम नई जांच रिपोर्ट में नहीं है। अरुण कुमार पर सीतापुर में तैनाती के दौरान सवा तीन करोड़ के घोटाले का आरोप लगा था। इसके बाद जांच शुरू कराकर उन्हें बरेली भेजा गया था। जांच में तो कुछ हुआ नहीं, यहां भी डीडीओ बने और तैनाती के बाद से ही एक के बाद एक घोटाले के आरोप में घिरते रहे लेकिन हुआ यहां भी कुछ नहीं।
कमिश्नर से बोले कृष्ण चंद्र- मेरा नहीं, डीडीओ साहब का खेल है ये
प्रभारी डीपीओ कृष्ण चंद्र ने बताया कि बुधवार को वह कमिश्नर के सामने उनके कार्यालय में पेश हुए थे। उन्हें बता दिया है कि एक जून को ही उन्हें चार्ज दिया गया था। बंद आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों के नाम पुष्टाहार भेजने का खेल इससे पहले का है। उस वक्त डीपीओ का चार्ज डीडीओ अरुण कुमार संभाल रहे थे। लिहाजा यह कार्रवाई उन्हीं पर होनी चाहिए। बकौल कृष्णचंद्र, कमिश्नर ने उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
अफसर खाएंगे पुष्टाहार तो और क्या होगा...
बरेली, अमृत विचार : आंगनबाड़ी केंद्रों के भ्रष्टाचार के चंगुल में घिरने का ही शायद असर है कि जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र यानी एनआरसी में भर्ती बच्चों की संख्या एक ही साल में ढाई गुना हो गई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में जनवरी से जून तक 104 कुपोषित बच्चे एनआरसी में भर्ती हुए थे लेकिन इस साल जनवरी से अब तक 284 बच्चे भर्ती हो चुके हैं।
फिलहाल सात बच्चों का इलाज चल रहा है। एनआरसी में अतिकुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी और आशा वर्कर भर्ती कराती हैं। यहां इनको 14 दिन रखकर इलाज के साथ पौष्टिक आहार और दवाएं दी जाती हैं। छुट्टी के बाद भी उनकी निगरानी की जाती है। जिला अस्पताल की एडीएसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि एनआरसी में बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, इसके लिए रोज एक टीम बच्चों की माताओं से फीडबैक लेती है। माताओं काे भी पोषक खानपान दिया जाता है।
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