रुद्रपुर: विधायक व मेयर समेत दस भाजपा नेताओं ने किया कोर्ट में सरेंडर

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Edited By Amrit Vichar
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रुद्रपुर, अमृत विचार। वर्ष 2022 में नामाकंन के दौरान आदर्श आचार संहिता और कोविड-19 के नियमों के उल्लघन करने पर कानूनी शिकंजे में फंसे विधायक, मेयर, पूर्व दर्जा राज्यमंत्री सहित दस वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद अदालत ने सभी को 15-15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत भी दी।

बताते चले कि 22 जनवरी 2022 को तत्कालीन एसएसपी द्वारा विधानसभा के चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी शिव अरोरा, मेयर रामपाल सिंह, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश परिहार, वरिष्ठ भाजपा नेता भारत भूषण चुघ, विवेक सक्सेना, गुरमीत सिंह, राजकुमार शाह, हरीश भट्ट, विकाश शर्मा और केके दास पर धारा-188 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था कि डीएम कार्यालय में बनाए गए नामाकंन स्थल पर सभी आरोपियों द्वारा कोविड-19 एवं आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया और बिना मास्क के प्रत्याशी अपने साथ दस लोगों को साथ लेकर नामाकंन कक्ष में गए।

आरोपी अपने साथ हजारों की भीड़ भी लेकर आए। लगातार नोटिस भेजने के बाद आखिरकार अदालत की सख्ती के बाद भाजपा नेताओं ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद युनुस अली की अदालत में आत्मसमर्पण का प्रार्थना पत्र पेश किया और अधिवक्ता दिवाकर पांडेय के माध्यम से शुक्रवार की सुबह आत्मसमर्पण किया।

जहां बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिवाकर पांडेय अदालत के सामने अपना बचाव तर्क रखा। जिरह सुनने के बाद सीजेएम द्वारा विधायक शिव अरोरा, मेयर रामपाल सिंह सहित दस भाजपा नेताओं को 15-15 हजार रुपये के जमानती सहित निजी मुचलके पर जमानत देकर रिहा कर दिया। जिसके बाद विधायक सहित भाजपा नेताओं ने राहत की सांस ली।


22 जनवरी 2022 को वह अपने प्रस्तावक और कुछ भाजपा नेताओं के साथ लोकतांत्रिक तरीके से नियमानुसार नामकंन केंद्र पहुंचे थे। जहां कई प्रत्याशियों के साथ भीड़ सहित लोग आ रहे थे। बावजूद इसके बिना पड़ताल किए तत्कालीन एसएसपी द्वारा महज दस भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को कोविड और आचार संहिता का आरोपी ठहराकर मुकदमा पंजीकृत किया गया। न्यायालय में सरेडर करने का उनका पहला अनुभव है। जिसका सम्मान करना हर भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी है। न्यायालय द्वारा भाजपा नेताओं को राहत दी गई।
- शिव अरोरा, विधायक रुद्रपुर विधानसभा

केंद्रीय आह्वान के बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को चुनाव लड़ाना उनका दायित्व है। उसी दायित्व को निभाने के लिए वह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विधायक प्रत्याशी के साथ नामाकंन केंद्र गए थे और नियमों का पालन भी किया गया। बावजूद इसके तत्कालीन एसएसपी द्वारा दूसरे दल को खुश करने के लिए मुकदमा पंजीकृत किया। बावजूद इसके न्यायालय का सम्मान करते हुए अदालत के सामने पेश हुए और न्यायालय द्वारा सभी को जमानत देकर रिहा भी किया गया।
- रामपाल सिंह,मेयर रुद्रपुर।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता पांडेय ने पेश की दलील
रुद्रपुर। विधायक शिव अरोरा,मेयर रामपाल सिंह सहित दस भाजपा के बडे नेताओं को सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण करवाने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता दिवाकर पांडेय ने अदालत में अपना तर्क दिया कि जिस वक्त सभी नेता अपने-अपने प्रत्याशियों के साथ नियमानुसार नामकंन केंद्र जा रहे थे।

तो वहां मौजूद हजारों की भीड़ में महज दस ही भाजपा नेता आरोपी क्यों बनाए गए। जबकि पुलिस के पास भीड़ किसने बुलाई और किसके साथ आई थी, इसका कोई प्रमाण नहीं था। ऐसे में लक्ष्य बनाकर दस वरिष्ठ भाजपा नेताओं को चिह्नित कर नियमों का उल्लंघन करने का आरोपी बनाया गया। जबकि भाजपा नेताओं ने हमेशा नियमों का पालन किया था। बचाव पक्ष के तर्क के बाद न्यायालय ने सभी को जमानत देकर रिहा किया।

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