हल्द्वानी: डब्ल्यूआईआई करेगा खुलासा, बाघ उत्तर प्रदेश का था या उत्तराखंड का

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। बाघ को लेकर उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के वन अफसरों में ठन गई है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर के डीएफओ ने उत्तराखंड एसटीएफ के दावे कि बाघ को बिजनौर की बूढ़ापुर रेंज में मारा गया था सिरे से नकार दिया है। डीएफओ ने बाघ की स्ट्रिप के जरिए उसका ‘घर’ पता लगाने का दावा किया है। फिलहाल डब्ल्यूआईआई की जांच में खुलासा हो जाएगा कि बाघ उत्तराखंड का है या उत्तर प्रदेश का है।

उत्तराखंड एसटीएफ, वाइल्ड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, तराई पूर्वी वन डिवीजन की टीम ने बीते शनिवार की देर सायं खटीमा टोल टैक्स से चार वन्यजीत तस्करों को दबोचा था। तस्करों से 11 फीट की बाघ की खाल, 15 किलो हड्डियां बरामद हुई थी। तस्करों की शिनाख्त कृष्ण कुमार, गजेंद्र सिंह, हरीश कुमार, संजय कुमार निवासीगण धारचूल को गिरफ्तार किया था। उनकी निशानदेही पर एसटीएफ की टीम ने ऊधम सिंह नगर के काशीपुर से शिकारी अर्जुन सिंह निवासी प्रगति विहार देहरादून को गिरफ्तार किया था।

एसटीएफ ने दावा किया था कि अर्जुन ने पूछताछ में बताया कि  उसने बाघ को जहर देकर मारा था। उसने यह बाघ बिजनौर डिवीजन की बूढ़ापुर रेंज से मारा गया है।

एसटीएफ व जंगलात ने भी इसको हाइलाइट किया। इसके बाद से उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के वन अफसरों में ठन गई है। बिजनौर के डीएफओ आशुतोष पांडेय ने दावा किया है कि बिजनौर के जंगल से कोईबाघ नहीं मारा गया है। बाघ की स्ट्रिप से रिकॉर्ड चेक  कर पता चल सकता है कि बाघ किस राज्य का है।

इधर, इस मामले की जांच अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) को सौंप दी गई है। डब्ल्यू आईआई बाघ की खाल की स्ट्रिप से रिकॉर्ड का मिलान के बाद तय होगा कि बाघ किस राज्य का है। 

अफसर दबी जुबान सीबीआई जांच की कर रहे मांग 
वन अफसर दबी जुबान बाघ की मौत में सीबीआई जांच की बात कर रहे हैं। वन विशेषज्ञों का दावा है कि बाघ को अकेला शिकारी नहीं मार सकता है। फिर बाघ की खाल निकालना व हड्डियां निकालना भी एक अकेले के वश की बात नहीं है। इसके पीछे पूरा गैंग काम कर रहा है। यदि इसकी सीबीआई जांच करवाईजाए तो बाघ के मारने वालों का पर्दाफाश हो सकता है।  

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