29 जुलाई को अखिल भारतीय शिक्षा समागम में शामिल होगें पीएम मोदी
शिमला। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ के जश्न के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 जुलाई को आईटीपीओ, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में दूसरे अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन करेंगे। शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम, देश के शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न नवीन पहल शुरू करने के लिए एक मंच बनने का वादा करता है
यह जानकारी भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में बुधवार को संस्थान के राष्ट्रीय अध्येता प्रोफेसर आनंद कुमार तथा प्रोफेसर हरपाल सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। इस अवसर पर प्रो. आंनद कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विकसित पाठ्यक्रम छात्रों को अत्यधिक लचीले ढांचे में बहु-विषयक और समग्र शिक्षा के अवसर प्रदान करता है जैसा कि परिकल्पित किया गया है।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को समावेश के बारे में बताते हुए संस्थान द्वारा इस दिशा में किए जा रहे नवाचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जहां आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी अत्याधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, वहीं शिक्षा नीति श्भारतीय ज्ञान प्रणालीश् पर पाठ्यक्रम भी पढ़ाती है। नई शिक्षा नीति उद्योग के सहयोग से व्यावसायिक कौशल विकसित करने में भी सक्षम बनाती है और स्वरोजगार को बढ़ावा देती है।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्येता प्रोफेसर हरपाल सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति व्यक्ति को शिक्षित करने के साथ साथ आत्मनिर्भर बनाने की भी बात करती है। यह राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति व्यक्ति सजग करते हुए उसे अपने राष्ट्र के प्रति दायित्वों का भी ज्ञान करवाती है। विभिन्न विषयों में परस्पर अंर्तसंबंधों का अन्वेषण करते हुए अध्ययन की स्वतंत्रता प्रदान करती है और उसके प्रावधान उपलब्ध करवाती है।
प्रो. हरपाल सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में किसी भी विषय पर अध्ययन करने की सुविधा देती है जो कि मौलिक ज्ञान के विकास में सहयोग करता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) कार्यान्वयन के साथ कौशल विकास पहल को एकीकृत करने पर मूल्यवान अंतर्दृष्टि साझा की। शिक्षा नीति में आज के प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में छात्रों को रोजगार के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल से लैस करने के महत्व पर जोर दिया गया है। उन्होंने कौशल विकास कार्यक्रमों एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य सिद्धान्तिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुप्रयोग के बीच अंतर को पाटना है।
प्रश्नों का उत्तर देते हुए दोनों वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डाला। विभिन्न प्रायोगिक समस्याओं के समाधान के बारे में भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि उपरोक्त ववक्ताओं सहित संस्थान के अधिकारी, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यम विभाग के अधिकारी एम एल वर्मा, केंद्रीय विद्यालय संगठन के अधिकारी गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने किया।
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