हल्द्वानी: टूटी नींद, जंगलात ने भी  शुरू की वनराज के शिकारियों की तलाश  

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। एसटीएफ के बाद अब जंगलात ने भी वनराज के शिकारियों पर शिकंजा कसने का मूड बना लिया है। वन अफसर भी उत्तराखंड में सक्रिय शिकारियों, वन तस्करों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है। बाघ का शिकार करने वाले को दबोचने की तैयारी में है।

एसटीएफ ने तराई पूर्वी वन डिवीजन, वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के साथ मिलकर बीते शनिवार की देर सायं खटीमा के टोल टैक्स से बोलेरो सवार चार वन्यजीव  तस्करों को गिरफ्तार किया था। इन तस्करों से बाघ की 11 फीट की एक खाल, 15 किग्रा हड्डियां बरामद हुई थी।

बाघ की खाल मिलने के बाद हड़कंप मच गया था हालांकि एसटीएफ ने मुख्य शिकारी अर्जुन सिंह निवासी प्रगति विहार देहरादून को काशीपुर से दबोच लिया था। उसने पूछताछ में बताया था कि बाघ को जहर देकर बिजनौर के बूढ़ापुर रेंज से मारा है। बाघ को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में तनातनी बढ़ गई है।

बिजनौर के डीएफओ आशुतोष पांडेय ने एसटीएफ के इस दावे को खारिज किया था। इसके बाद वन विभाग भी सतर्क हो गया है। वन विभाग भी बाघ के मुख्य शिकारी को पकड़ने के बाद इसमें लिप्त अन्य शिकारियों की तलाश में जुट गया है। पश्चिमी वन वृत्त की पांचों वन डिवीजन की सभी वन रेंज में हाई अलर्ट जारी किया गया है। वन अफसरों को मुखबिर तंत्र सक्रिय करने के साथ ही दोषियों पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए गए हैं। 

जंगलात अभी बाघ के शिकार में दोषियों को पकड़ने में जुटा हुआ है। बाघ किसका है, इसकी पुष्टि फिलहाल बाद में की जाएगी। बाघ की स्ट्रिप, खाल का रिकॉर्ड भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भी भेजा जाएगा ताकि इसकी पुष्टि हो सके।
- दीप चंद्र आर्य, वन संरक्षक पश्चिमी वन वृत्त हल्द्वानी

बाघ के लिए मुफीद हैं पश्चिमी वन वृत्त के जंगल
उत्तराखंड के पश्चिमी वन वृत्त में किसी भी वृत्त से ज्यादा बाघ हैं। पश्चिमी वन वृत्त में रामनगर, तराई पूर्वी, तराई पश्चिमी, तराई केंद्रीय और हल्द्वानी वन डिवीजन आती हैं। इसका क्षेत्र ऊधम सिंह नगर, चम्पावत, और नैनीताल जिले में फैला हुआ है। पिछली गणना के मुताबिक पश्चिमी वन वृत्त में 125 से अधिक बाघ हैं। यहां के जंगल बाघों का बेहतर वासस्थल है

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