हल्द्वानी: एसटीएच में एचआईएस की सुस्त चाल, मरीज बेहाल
हल्द्वानी, अमृत विचार। कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल हल्द्वानी का हॉस्पिटल इन्फार्मेशन सिस्टम (एचआईएस) हांफने लगा है। इससे हर दिन मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सोमवार को भी सिस्टम के हांफने से मरीज दिनभर परेशान रहे।
मोहर्रम व रविवार के अवकाश के बाद एसटीएच में मरीजों की भारी भीड़ रही। यहां करीब 1582 मरीज ओपीडी में चिकित्सक के परामर्श लेने पहुंचे थे। सुबह 8 बजे से ही अस्पताल के पर्चा काउंटर के बाहर मरीज और तीमारदार लंबी-लंबी कतार में खड़े रहे। लेकिन एचआईएस सिस्टम की सुस्त चाल से लाइन में खड़े मरीज बेहाल हो उठे। एक पर्चा बनाने में करीब 2 से 3 मिनट का समय लग रहा था। दोपहर एक बजे तक पर्चा काउंटर के बाहर मरीजों की लाइन लगी रही। एचआईएस सिस्टम की धीमी गति की समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इसके समाधान के लिए अभी तक कोई पहल नहीं हो पाई है।
बता दें कि सुशीला तिवारी अस्पताल का राजकीयकरण होने से पहले ट्रस्ट के समय एचआईएस सिस्टम लागू किया गया था। उस दौरान यहां मरीजों की संख्या कम थी। एचआईएस के तहत अस्पताल का सारा काम कम्प्यूटर पर होता था। साल 2010 में राजकीयकरण होने और मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद सिस्टम लड़खड़ाने लगा। वर्तमान में सिर्फ ओपीडी के पर्चे, भर्ती और डिस्चार्ज का कार्य एसआईएस सिस्टम से होता है। खून की जांच से लेकर अन्य सभी कार्य मैन्युअल होते हैं। बिलिंग तक का काम मैन्युअल किया जाता है। इसके बावजूद एचआईएस सिस्टम में परेशानी बनी है।
12 साल में एक बार भी नहीं हुआ अपग्रेड
वर्ष 2004 में उत्तराखंड फॉरेस्ट हॉस्पिटल ट्रस्ट के समय एचआईएस सिस्टम लागू किया गया था। 2010 में सुशीला तिवारी अस्पताल का राजकीयकरण होने के बाद 2011 में एचआईएस सिस्टम को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू हुई। हैरानी की बात ये है कि 12 साल में अपग्रेड की प्रक्रिया परवान नहीं चढ़ पाई। मरीजों के बढ़ते दबाव और शासन के उदासीन रवैये के कारण आज एचआईएस सिस्टम हांफने लगा है।
कागजों में कार्रवाई, धरातल पर नजीता जीरो
राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में एचआईएस सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए कई दौर की बैठकें और कागजी कार्रवाईयां हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक धरातल पर नतीजा जीरो है। कॉलेज प्रबंधन मामले में निदेशालय को पूर्व में प्रस्ताव भेज चुका है, जिस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है। ऐसे में मरीजों हर दिन परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
एचआईएस सिस्टम को अपग्रेड करने की प्रक्रिया गतिमान है। कई बैठकें हो चुकी हैं। प्रस्ताव भी भेज गये हैं। इसमें शासन स्तर से कार्यवाही होनी है।
- डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी
