आस्था : गहनाग देव आश्रम पर उमड़े श्रद्धालु, किया दर्शन-पूजन
दूर-दूर से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
मिल्कीपुर/ अयोध्या, अमृत विचार। मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत पारा ब्रह्मनान में पचासों वर्ष पूर्व से स्थापित गहनाग देव आश्रम हिंदुओं के श्रद्धा और विश्वास का केंद्र माना जाता है। जहां सावन महीने में हजारों की संख्या में शिवभक्त यहां आकर गहनाग देव बाबा को दूध, हलवा, पूरी अर्पित कर मिन्नत मांगते हैं।
लोगों का मानना है कि गहनाग देवस्थान पर विषैले जंतुओं का काटा व्यक्ति ठीक हो जाता है। स्थान की महिमा आसपास के पड़ोसी जनपदों तक विख्यात है पड़ोसी जनपद के भी महिला, पुरुष व बच्चे सावन माह के सोमवार और शुक्रवार को आकर पूरी, हलवा का प्रसाद गहनाग देव को चढ़ा कर उनसे मंगल कामना की आराधना करते हैं। यहां के बुजुर्ग माता प्रसाद दुबे ने बताया कि इस टीले पर पहले एक छोटा सा नीम का पेड़ व सरपत के बीच एक बिल थी जहां नाग पंचमी के दिन ग्रामीण लावा एवं दूध चढ़ाते थे। लावा दूध चढ़ाते समय एक बार नाग देवता ने दर्शन देकर दूध का पान किया तब से इस स्थान पर पूजा-पाठ होने लगा। सावन माह में दूर-दूर से लोग यहां आकर गहनाग देव का दर्शन पूजन करते हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से यहां पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं।
ट्रस्ट के माध्यम से चलती है मंदिर की व्यवस्था
मंदिर के महंत मंसाराम दास ने बताया कि मंदिर को संवारने में ब्रह्मलीन लोधे दास का बड़ा योगदान रहा है। स्थान तालाब खाते की भूमि पर 18 बीघे रक्वे के टीले पर बसा हुआ है, बगल श्रद्धालुओं के नहाने के लिए सरोवर भी है। परिसर में गहनाग देव आश्रम, बजरंगबली, आस्तिक बाबा आश्रम, रामजी सहित दुर्गा माता का मंदिर भी है। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए जय गहनाग बाबा गौ सेवा ट्रस्ट पारा ब्रह्मनान (मरेमा) के नाम से बनाया गया है। ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर की मरम्मत, साज-सज्जा तथा प्रसाद व मंदिर से संबंधित अन्य खर्चे उसी मद से किए जाते हैं। सरकार की तरफ से इस ट्रस्ट को कोई सहायता आज तक मुहैय्या नहीं कराई गई है।
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