पीलीभीत: मासूम की मौत, गुस्साए परिजन बोले पोस्टमार्टम तो यही करेंगे क्या करूं ...जानिए पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। जिला अस्पताल में निमोनिया से पीड़ित बच्चे की भर्ती कराने के छह घंटे बाद मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि डॉक्टरों ने बच्चे का इलाज सही से नहीं किया। जबकि डॉक्टरों का कहना था कि निमोनिया से ग्रस्त होने के कारण बच्चे की हालत पहले ही काफी गंभीर थी। कई घंटे तक हंगामा करने के बाद परिवार वाले बच्चे का शव लेकर गांव लौट गए।

सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव चिड़ियादाह निवासी संजीव कुमार ने बताया कि वह मूलरूप से दियोरिया कोतवाली क्षेत्र के गांव मधवापुर के रहने वाले हैं। वह पत्नी और बच्चों के साथ किराए पर चिड़ियादाह गांव में रह रहे हैं। मेहनत मजदूरी कर परिवार को पालन पोषण करते हैं। बुधवार दोपहर में उसके दो माह के पुत्र प्रेम की अचानक हालत बिगड़ गई। इस पर करीब एक बजे उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इमरजेंसी में उसका इलाज शुरू हुआ, तो उसकी हालत में सुधार होने लगा था। इसी दौरान से इमरजेंसी से निकालकर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 

आरोप है कि वार्ड में डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर खानापूरी शुरू कर दी। यह भी आरोप लगाया कि बच्चे को जो बोलत लगाई गई, उसमें कोई दवा तक नहीं मिलाई गई। कई घंटे तक डॉक्टरों ने उसे देखा तक नहीं। इससे उसकी हालत फिर बिगड़ती चली गई। जब काफी देर तक डॉक्टर वहां नहीं पहुंचे, तो परिजन बुलाने गए। उसके बाद भी डॉक्टर काफी देर बाद आए। तब तक बच्चे की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। 

डॉक्टरों ने उसे आनन फानन में फिर से इमरजेंसी कक्ष में भर्ती कर दोबारा इलाज शुरू कर दिया। लेकिन उसकी मौत हो गई। परिजन का कहना था कि डॉक्टरों ने इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट करने में जल्दबाजी की। काफी देर तक हंगामा करने के बाद परिजन शव लेकर चले गए। तब जाकर मामला शांत हो सका। उधर, इंस्पेक्टर सुनगढ़ी जगत सिंह का कहना है कि इस तरह की कोईसूचना नहीं मिली है। अगर परिजन शिकायत करते हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

पिता बोला: जिनकी लापरवाही से मौत हुई, वहीं करते पोस्टमार्टम
संजीव कुमार ने बताया कि बच्चे की मौत के बाद वह और उसकी पत्नी कोमल देवी इमरजेंसी कक्ष से बाहर आ गए थे। इसी दौरान डॉक्टरों ने बच्चे के दोनों हाथों और दोनों पैरों में कई जगह इंजेक्शन लगाने के निशान बना दिए। इसीलिए बच्चे के शव को लेकर गांव चले गए। उनका कहना था कि अगर पोस्टमार्टम कराते भी तो वह भी इसी अस्पताल के डॉक्टर करते। जिनकी लापरवाही से मासूम की मौत हुई है। वह डॉक्टर खुद की लगती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कैसे निकालते? पोस्टमार्टम ना कराने के पीछे यही वजह बताई।

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